प्याज की कीमतों में अचानक आए उछाल से चिंतित सरकार ने इसके निर्यात पर तत्काल प्रभाव से 15 जनवरी तक प्रतिबंध लगा दिया है। राजधानी दिल्ली के खुदरा बाजारों में इस समय प्याज 60 से 70 रुपए प्रति किलो के भाव बिक रहा है। नियमन एजेंसी नाफेड को निर्देश दिया गया है कि वह निर्यातकों को निर्यात की मंजूरी देना फिलहाल रोक दे। जिन निर्यातकों को नाफेड और 12 अन्य एजेंसियों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिल चुकाऔरऔर भी

उम्मीद के मुताबिक एक और उतार-चढ़ाव से भरा दिन। सेंसेक्स बंद तो हुआ 24 अंक बढ़कर, लेकिन दिन भर में इसने 295 अंकों की पेंग भरी। वैसे, आज के स्टार परफॉर्मर रहे – हीरो होंडा और इस्पात इंडस्ट्रीज। इन दोनों की शिनाख्त में हम सबसे आगे रहे हैं। इस्पात ने कहानी को मुकाम पर पहुंचाने में पूरे बारह महीने लगा दिए। लेकिन हम खुश हैं क्योंकि इस स्टॉक ने 30 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया हैऔरऔर भी

अगले साल मार्च 2011 तक महंगाई की दर 5.5 फीसदी के करीब आकर ठहर जाएगी और देश की आर्थिक विकास दर 8.5 फीसदी रहेगी। यह दावा है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। उन्होंने कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन के दूसरे दिन अपने संबोधन में कहा कि ‘‘ देश में मुद्रास्फीति गंभीर चिंता की वजह बनी हुई है। हमने बढती महंगाई काबू पाने की पूरी कोशिश की है और आगे भी करते रहेंगे।’’ बता दें कि नवंबर में थोक मूल्यऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि वे 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के सिलसिले में संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के सामने पेश होने को तैयार हैं। उन्होंने कांग्रेस के 83वें महाधिवेशन के दूसरे व आखिरी दिन अपने संबोधन में कहा कि अगर लोक लेखा समिति उन्हें 2जी स्पेक्ट्रम के बारे में पूछताछ के लिए बुलाती है तो उन्हें उसके सामने पेश होने में खुशी होगी क्योंकि उनके पास छिपाने को कुछ भी नहीं है। अपने शांतऔरऔर भी

पुंज लॉयड का शेयर (बीएसई – 532693, एनएसई – PUNJLLOY) दो महीने पहले 15 अक्टूबर को ऊपर में 134.20 रुपए तक गया था। इसके बाद गिरते-गिरते 26 नवंबर को 81 रुपए की तलहटी पर चला गया। अब बीते हफ्ते 16 दिसंबर तक ऊपर की दिशा पकड़कर 106.30 रुपए पर पहुंच गया। उसमें बढ़त का ताजा सिलसिला 10 दिसंबर को शुरू हुआ है। उसी दिन उसने थाईलैंड की कंपनी पीटीटी पब्लिक लिमिटेड से 1292 करोड़ और भारत कीऔरऔर भी

निरंतर नए ऑरबिट में जाने की कोशिश करना इंसान का मूल स्वभाव है। इसलिए हम रूटीन से ऊब जाते हैं। लेकिन नए ऑरबिट में जाकर भी नए चक्र में बंधना पड़ता है। चक्र के इस चक्कर से मुक्ति नहीं।और भीऔर भी