देश के ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट का सक्रिय इस्तेमाल करनेवालों की संख्या चालू वर्ष 2010 के अंत तक 54 लाख हो जाएगी। यह 2009 के सक्रिय इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 42 लाख से 28.6 फीसदी अधिक होगी। यह अनुमान है इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) और मार्केट रिसर्च फर्म, आईएमआरबी की संयुक्त अध्ययन रिपोर्ट का। रिपोर्ट से पता चला है कि इस समय गांवों के 16 फीसदी लोग इंटरनेट का इस्तेमाल ऑनलाइन समाचार पढ़ने केऔरऔर भी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आयकर विभाग के खिलाफ दायर ब्रिटिश कंपनी वोडाफोन की वह याचिका खारिज कर दी है जिसमें उसने कहा था कि विभाग को भारतीय सीमा से बाहर हुए विलय के सौदे पर टैक्स लगाने का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने बुधवार को सुनाए गए अंतिम फैसले में कहा है कि अधिकार क्षेत्र के आधार पर आयकर विभाग के आदेश को रोका नहीं जा सकता। अब वोडाफोन को करीब 12,000 करोड़ रुपए का टैक्स अदाऔरऔर भी

भारी ऊंच-नीच और इंट्रा-डे सौदों की मार दिखाती है कि बाजार में मंदी से कमाई करनेवाले मंदड़िये आक्रामक हो गए हैं। हालांकि बाजार पर पूरा नियंत्रण अब भी तेजड़ियों का है और उनकी लय-ताल को तोड़ना कठिन ही नहीं, आत्मघाती भी है क्योंकि हकीकत यह है कि बाजार में रिटेल और एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) निवेशकों की एंट्री हो चुकी है। नोट करने की बात यह है कि मंदड़ियों के आक्रमण के बावजूद निफ्टी कल से नीचेऔरऔर भी

भारत में 577 विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईज़ेड) को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से 114 में औद्योगिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। इनमें से 90 फीसदी का आकार 3 वर्ग किलोमीटर से कम है। दूसरी तरफ चीन में केवल पांच एसईज़ेड हैं। इसमें से अकेले शेनझेन एसईज़ेड ही 2000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। भारत ने 1965 में ही एशिया का पहला निर्यात संवर्धन ज़ोन कांडला (गुजरात) में बना लिया था। चीन ने हमसे सीखकर 1980 मेंऔरऔर भी

वाइकिंग मिथक के अनुसार ग्रहण तब लगता है जब स्कोल और हैती नाम के दो भेड़िए सूरज या चंद्रमा को जकड़ लेते हैं। इसीलिए जब भी ग्रहण पड़ता था तो वाइकिंग लोग खूब शोर मचाते और ढोल बजाते थे ताकि वे भेड़िए डर कर आसमान से भाग जाएं। कुछ समय बाद लोगों ने महसूस किया कि उनकी ढोल-तमाशे का का ग्रहण पर कोई असर नहीं पड़ता। ग्रहण तो अपने-आप ही खत्म हो जाता है। प्रकृति के तौर-तरीकोंऔरऔर भी

इस साल जनवरी में जिसने भी जयप्रकाश एसोसिएट्स का शेयर 160-165 रुपए के भाव पर खरीदा होगा, वह इस समय वाकई दुखी होगा। उसका दुख स्वाभाविक है कि क्योंकि यह शेयर 1 सितंबर 2010 को अपने 52 हफ्ते के न्यूनतम स्तर 107.65 रुपए पर आ चुका है। इस तरह यह शेयर अब तक 35 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है, जबकि इसी दौरान बीएसई सेंसेक्स 4.5 फीसदी बढ़ा है। जिसने यह शेयर पिछले साल अक्टूबर में 180औरऔर भी

जिज्ञासा ही किसी के जीनियस बनने का आधार है। हर बच्चा तब तक जीनियस बनने की संभावना रखता है जब तक हम, हमारा परिवेश और हमारी शिक्षा प्रणाली उसकी जिज्ञासा को कुंद नहीं कर देती।और भीऔर भी