राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति की मैली चादर में अब छेद भी होने लगे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की दो प्रमुख कंपनियों, एनटीपीसी और पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ने इन खेलों की स्पांसरशिप के लिए पहले वादा किए गए 60 करोड़ रुपए में से बाकी बचे 40 करोड़ रुपए नहीं देने का फैसला किया है। दोनों कंपनियों के निदेशक बोर्ड ने अपनी-अपनी अलग बैठकों में बुधवार को यह निर्णय लिया। गौरतलब है कि 3 से 14 अक्टूबर तक होनेवालेऔरऔर भी

रोल्टा इंडिया (बीएसई कोड – 500366, एनएसई कोड – ROLTA) के शेयर का भाव अभी बीएसई में 173.60 रुपए और एनएसई में 174.20 रुपए चल रहा है। इसकी बुक वैल्यू 118.10 रुपए है, जबकि ठीक पिछले बारह महीनों का (टीटीएम) ईपीएस 22.36 रुपए है। इस तरह यह शेयर 7.76 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि आईटी सॉफ्टवेयर उद्योग की अन्य प्रमुख कंपनियों में विप्रो का पी/ई अनुपात 14.03, टीसीएस का 38.12 और इनफोसिस काऔरऔर भी

हमने तो कर दिया, कहने से काम नहीं चलता। काम को अंजाम तक पहुंचाना होता है। यह सुनिश्चित करना बीज फेंकनेवाले का दायित्व है कि बीज मिट्टी में पहुंचकर अंकुर और फिर अंकुर से पौधा बना कि नहीं।और भीऔर भी

मानसून के समाप्त होने और त्यौहारी मौसम शुरू होने के साथ सीमेंट, रीयल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में आनेवाले दिनों में तेजी आने की उम्मीद है। सीएनआई रिसर्च के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक किशोर पी ओस्तवाल ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा, ‘‘मानसून के समाप्त होने और त्यौहारी मौसम शुरू होने के साथ सीमेंट, रीयल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों के प्रति निवेशकों की रूचि बढ़ेगी क्योंकि इन शेयरों सेऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पब्लिक इश्यू (आईपीओ व एफपीओ) में रिटेल निवेशकों की निवेश सीमा को एक लाख रुपए से बढ़ाकर दो लाख रुपए करने की पेशकश की है। मजे की बात है कि इसके लिए उसने मुद्रास्फीति के बढ़ने का तर्क दिया है, जबकि शेयर के इश्यू मूल्य का कोई सीधा रिश्ता मुद्रास्फीति से नहीं होता। उसने इस बारे में एक बहस पत्र पेश किया है जिसमें सभी संबंधितऔरऔर भी

मैं ये तो नहीं कहता कि एफआईआई मूरख हैं। आखिर वे हमारे बाजार की दशा-दिशा तय करते हैं। लेकिन इतना जरूर है कि उन्हें बहुत आसानी से मूर्ख बनाया जा सकता है या ऐसा भी हो सकता है कि वे आसानी से मूर्ख बनने का स्वांग करते हों। उन्होंने अपने इर्दगिर्द 200 करोड़ रुपए के बाजार पूंजीकरण की लक्ष्मण रेखा खींच रखी है। वे वही स्टॉक इतने या इससे ज्यादा बाजार पूंजीकरण पर खरीदते हैं जिन्हें ऑपरेटरऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2009-10 में कांग्रेस की आय 497 करोड़ रुपए रही है। इसके बाद बीजेपी की आय 220 करोड़ रुपए और बीएसपी की आय 182 करोड़ रुपए रही है। यह जानकारी सूचना अधिकार के तहत हासिल की गई है। इस दौरान सीपीएम की आय 63 करोड़, एनसीपी की आय 40 करोड़, सपा की आय 39 करोड़, आरजेडी की आय चार करोड़ और सीपीआई की आय एक करोड़ रुपए रही है। 2002-03 से 2009-10 के बीच कांग्रेस कीऔरऔर भी

डिशमैन फार्मास्यूटिकल्स एंड केमिकल्स (बीएसई कोड – 532526, एनएसई कोड – DISHMAN) की पहली तिमाही के नतीजे अच्छे नहीं रहे हैं। साल भर पहले की तुलना में उसकी कुल आय 243 करोड़ रुपए से 13 फीसदी घटकर 212 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 39.2 करोड़ रुपए से 31 फीसदी घटकर 27.3 करोड़ रुपए रह गया है। कंपनी का सकल लाभ मार्जिन भी 28.2 फीसदी से गिरकर 25.8 फीसदी रह गया है। ऐसा तब है जब उसने अपनीऔरऔर भी

सतह के नीचे, समय के पार बहुत कुछ घटता रहता है, हम नहीं देख पाते। सूरज छिपता है, खत्म नहीं होता। शांत पृथ्वी के भीतर चट्टानें दरकती हैं, जलजला आता है। सावधान! शांतिभंग का खतरा है, किसान अशांत हैं।और भीऔर भी

देश में इस समय कुल 82 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी) हैं जिनकी 15,475 शाखाएं 619 जिलों में फैली हुई हैं। 31 मार्च 2010 तक की माली हालत के आधार पर 82 में तीन आरआरबी घाटे में चल रहे हैं। ये हैं – मणिपुर रूरल बैंक (2.98 करोड़), पुडुवल भर्थियार ग्रामा बैंक (0.22 करोड़) और महाकौशल ग्रामीण बैंक (2.45 करोड़)। सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को नाबार्ड की तरफ से तकनीक उन्नयन और ज्यादा आबादी तक पहुंचने के लिएऔरऔर भी