चीन ने सोने के जेवरात में भारत को पीछे छोड़ा

भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता माना जाता है। लेकिन बीती तिमाही में चीन में सोने के जेवरात की मांग 2009 के शुरूआती दौर के बाद पहली बार भारत से ज्यादा हो गई है। यह बात सामने आई है वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट से।

रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जुलाई से सितंबर की तिमाही में चीन में सोने के जेवरात की खरीद साल भर पहले की समान अवधि की तुलना में 13 फीसदी बढ़कर 131 टन हो गई, जबकि भारत में यह 26 फीसदी घटकर 125.6 टन रह गई। भारत में इस दौरान सोने के सिक्कों व छड़ों समेत सारी खरीद 203.3 टन की रही जो पहले से 23 फीसदी कम है। दूसरी तरफ चीन में कुल स्वर्ण निवेश 16 फीसदी बढ़कर 191.2 टन हो गया।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के प्रबंध निदेशक मारकस ग्रब ने एक इंटरव्यू में कहा है कि सोमा पश्चिम में अनिश्चितता से डरकर किया गया निवेश नहीं, बल्कि एशिया में संपदा बटोरने का निवेश है। वैसे सितंबर 2011 की तिमाही में दुनिया में सबसे ज्यादा सोने के सिक्कों व छडों की खरीद अनिश्चितता से घिरे यूरोप में हुई है। यूरोप में यह खरीद कुल 118.1 टन की रही है। सबसे ज्यादा 4.9 टन की वृद्धि फ्रांस में देखी गई, जबकि 59.3 टन की मांग के साथ जर्मनी यूरोप में सोने की छड़ों व सिक्कों का सबसे बड़ा बाजार बना रहा।

सितंबर 2011 की तिमाही में दुनिया में सोने की कुल निवेश मांग 33 फीसदी बढ़कर 468.1 टन पर पहुंच गई। इसमें से 390.5 टन की मांग सोने की छड़ों व सिक्कों के भौतिक रूप में रही। बाकी मांग गोल्ड ईटीएफ के रूप में आई। इस तिमाही में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने 148.4 टन सोना खरीदा। इसमें मुख्य योगदान रूस, थाईलैंड, व बोलिविया का रहा।

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