जीवन बीमा कंपनियों के यूनिट लिंक्ड प्लान (यूलिप) पर सेबी और आईआरडीए में छिड़ी जंग आखिरकार वित्त मंत्रालय के दरवाजे पर पहुंच कर शांत हो गई। पूंजी बाजार नियामक सेबी और बीमा नियामक आईआरडीए में इस बात पर रजामंदी हो गई है कि वे इस मुद्दे पर उचित कानूनी मंच से वैधानिक जनादेश हासिल करेंगे। जब तक ऐसे किसी कोर्ट का फैसला नहीं आता, तब तक मौजूदा स्थिति बनाए रखी जाएगी। दूसरे शब्दों में आईआरडीए ही बीमाऔरऔर भी

शेयर ब्रोकर इस कोशिश में लगे हैं कि सरकार शेयर सौदों पर लगनेवाले सिक्यूरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) को कम कर दे। एसटीटी को 2004-05 से लागू किया गया है और इनकी मौजूदा दर 0.125 फीसदी है। यह खरीद-बिक्री दोनों ही तरह के शेयर सौदों पर लगता है। अपनी मांग लेकर ब्रोकरों का प्रतिनिधिमंडल वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से भी मिलने वाला है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक रवि नारायण ने एक समारोह के दौरान मीडिया सेऔरऔर भी

सरकार ने सचमुच में ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ ही डाला है। पशुओं के चारा विकास के लिए उसने प्रति पशु सिर्फ सवा दो रुपये का प्रावधान किया है। इसी मुट्ठी भर चारे से वह श्वेतक्रांति का स्वप्न देख रही है। जबकि दूध के मूल्य 45 से 50 रुपये प्रति किलो पहुंच गये है। हालात यही रहे तो नौनिहालों के मुंह का दूध भी छिन जाएगा। बजट में चारा विकास, उन्नतशील बीज, चारागाहों को बचाने और उनकेऔरऔर भी

दूध, फल और दालों की कीमते बढ़ने से खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति की दर 27 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में 17.70 फीसदी हो गई, जबकि इससे पिछले हफ्ते में यह 16.35 फीसदी थी। इस आधार पर कहा जा रहा है कि रिजर्व बैंक 20 अप्रैल को घोषित की जानेवाली सालाना मौद्रिक नीति में ब्याज दरें बढ़ा सकता है। लेकिन सिस्टम में लिक्विडिटी की अधिकता को देखते हुए इसकी संभावना कम ही लगती है। असल में बैंकोंऔरऔर भी

निवेशक खुद सीधे शेयर बाजार में पैसा लगाने की बजाय म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों से ज्यादा फायदा उठा सकते हैं। यह बात साबित होती है पिछले एक साल में ऐसी स्कीमों द्वारा दिए गए रिटर्न से। पिछले एक साल में बीएसई का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स जहां करीब 70 फीसदी बढ़ा है, वहीं म्यूचुअल फंडों की इक्विटी स्कीमों का एनएवी (शुद्ध आस्ति मूल्य0 152 फीसदी तक बढ़ा है। म्यूचुअल फंड के आंकड़े और शोध से जुड़ी संस्थाऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर पैदा करनेवाली सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नरेगा में धन के वितरण की कोई समान नीति नहीं है। बुधवार को एक मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस के जी बालाकृष्णन की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि इस योजना में भारी-भरकम रकम डाली गई है। लेकिन यह रकम या तो सही लाभार्थियों तक न पहुंचकर गलत हाथों में चली जाती है याऔरऔर भी

मुम्बईकरों को पानी की परेशानी के बीच सूचना के अधिकार से एक हैरतअंगेज सूचना निकली है कि बृहन्मुम्बई महानगर पालिका (बीएमसी) द्वारा कम से कम 18 पानी कंपनियों को उनकी मुनाफाखोरी के लिए लाखों लीटर पानी दिया जा रहा है। एक तरफ जहां शहर के निवासियों के सामने पानी का घनघोर संकट छाया हुआ है वहीं दूसरी तरफ इन 18 कंपनियों को हर रोज 8,10,000 लीटर पानी दिया जा रहा है और बदले में उनसे पूरे सालऔरऔर भी

सत्यम कंप्यूटर्स के बदनाम घोटाले में आंध्र प्रदेश सरकार की भी भूमिका रही है। यह बात भारतीय महालेखाकार (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट राज्य विधानसभा में पेश की जा चुकी है। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि राज्य सरकार ने कंपनी को विशाखापटनम के नजदीक 42.5 एकड़ जमीन महज 10 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से दी थी। जहां इस जमीन की कीमत 170 करोड़ रुपए बनती है, वहीं सरकार नेऔरऔर भी

लेनदेन की अंतरराष्ट्रीय संस्था वीसा ने ग्राहकों के प्रीमियम के भुगतान के लिए देश की बीस प्रमुख कंपनियों से एक करार किया है जिसके तहत ग्राहक साधारण या जीवन बीमा प्रीमियम की अदायगी अपने वीसा कार्ड के जरिए कर सकते हैं। बता दें कि हमारे बैंकों के जितने भी डेबिट या क्रेडिट कार्ड हैं उन्होंने दुनिया की दो प्रमुख भुगतान कंपनियों वीसा या मास्टर कार्ड से टाई-अप कर रखा है। इसलिए आप अपने कार्ड पर इनका लोगोऔरऔर भी

देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक) ने सस्ते या टीजर होम लोन की स्कीम 30 अप्रैल 2010 तक बढा दी है। पहले यह स्कीम 31 मार्च 2010 को खत्म होनी थी। इस स्कीम के तहत होम लोन लेनेवाले को पहले साल केवल 8 फीसदी सालाना की दर से ब्याज देना होता है। अभी तक दूसरे व तीसरे साल ब्याज की दर 8.5 फीसदी रखी गई है। लेकिन 1 अप्रैल या उसके बाद होम लोनऔरऔर भी