यह कंपनी नोट नहीं छापती, बैंक भी नहीं है। लेकिन कैश इसकी ताकत है। खास कमोडिटी के धंधे से जुड़ी है। लेकिन जिंसों के अंतरराष्ट्रीय भाव 16 साल की तलहटी पर हैं, चीन की आर्थिक सुस्ती से समूची दुनिया त्रस्त है, डंपिंग का मंडराता खतरा है, तब भी इससे कंपनी की सेहत पर कोई फर्क नहीं। फिर, सरकारी कंपनी होने के बावजूद इसने शेयरधारकों की दौलत घटाई नहीं, बढ़ाई है। तथास्तु में आज इसी कंपनी का दमखम…औरऔर भी

कोयल कभी घोंसला नहीं बनाती। वो बड़ी चालाकी से अपने अंडे कौए के घोंसले में डाल देती है। शेयर बाज़ार में निवेश करना ऐसा ही है। बस ‘कौए’ की सही पहचान होनी चाहिए। ऐसा न हो कि वो आपका ‘अंडा’ ही खा जाए। बुरी कंपनियां निवेशकों की दौलत खा जाती हैं, जबकि अच्छी कंपनियां शेयरधारकों की दौलत बराबर बढ़ाती जाती हैं। आज तथास्तु में ऐसी कंपनी जिसने 37 सालों में दिया है 21% का सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न…औरऔर भी

भारत विशाल संभावनाओं वाला देश है। प्रकृति की जैसी कृपा व संपदा हमारे पास है, जैसा इंसानी जीवट देश के कोने-कोने तक फैला है, उसके आपसी मेल से भारत कहीं का कहीं पहुंच सकता है। और, इस मेल-मिलाप व सहयोग का मंच बाज़ार उपलब्ध कराता है। सरकार इसके खिलने में बाधा न डाले, माकूल नीतियों से इसे प्रेरित करे तो बाकी काम अवाम की उद्यमशीलता कर डालती है। इसी का नमूना है तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

बचत सही जगह नहीं लगाई तो उसे मुद्रास्फीति की दीमक खा जाएगी। निवेश का मूल मकसद मुद्रास्फीति को काटना है। बैंक एफडी सुरक्षित है। लेकिन साल का 9% भी ब्याज मिले तो 10% टैक्स कटने के बाद रिटर्न 8.1% रह जाता है। वहीं, लिस्टेड कंपनी में निवेश करें और एक साल बाद बेचकर जितना भी फायदा कमाएं, उस पर टैक्स नहीं लगता। ऊपर से वो 8.2% लाभांश दे तो क्या कहने! आज तथास्तु में यही दिलदार कंपनी…औरऔर भी

कंपनी का शेयर 1.4 के पी/ई और 0.2 के पी/बी अनुपात पर ट्रेड हो रहा हो, उसका ऋण-इक्विटी अनुपात 0.7 हो और सालाना लाभांश यील्ड 17.7% हो तो किसी भी निवेशक का मन उसमें धन लगाने को ललचा जाएगा। पर, आईटी कंपनी हेलियोज़ एंड मैथेसन इतना होने के बावजूद न तो जमाकर्ताओं का धन और न कर्मचारियों का वेतन समय से दे पा रही है। इसलिए अंश नहीं, संपूर्ण को देखना ज़रूरी है। अब आज का तथास्तु…औरऔर भी

स्मॉल-कैप कंपनियों के शेयर जमकर उछलते हैं तो गिरते भी हैं उतनी ही तेज़ी से। वहीं, मिड-कैप कंपनियों के साथ भी कमोबेश यही होता है। लेकिन मजबूत लार्ज-कैप कंपनियां अगर सही भाव पर पकड़ ली जाएं तो उनमें धीमी ही सही, मगर निरतंर वृद्धि होती रहती है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक लार्ज-कैप कंपनी जिसके शेयर बीते तीन महीनों में 21% गिर चुके हैं। अभी इसमें निवेश करना लंबे समय में काफी लाभकारी साबित होगा।…और भीऔर भी

शेयरों के भाव कभी न कभी अपने अंतर्निहित मूल्य तक पहुंचते ही हैं। चढ़ा हुआ स्टॉक नीचे उतरता है और गिरा हुआ स्टॉक ऊपर भी उठता है। फिर, निवेश करते वक्त सुरक्षित मार्जिन भी लेकर चलना होता है। अगर किसी स्टॉक में ऐसा मार्जिन न दिखे तो फिलहाल उसमें निवेश नहीं करना चाहिए और हमें उसके गिरने की बाट जोहनी चाहिए। नहीं गिरे तो उसका मोह छोड़ देना ही श्रेयस्कर है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

शेयरों के भाव बढ़ते हैं तो लोगबाग बावले हो जाते हैं और उनमें खरीदने की होड़ मच जाती है। चालू वित्त वर्ष 2014-15 में दिसंबर तक के नौ महीनों में इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीमों में धन लगानेवालों की संख्या 12.12 लाख बढ़ गई। लेकिन अगस्त 2013 में जब बाज़ार गिरा हुआ था, तब सभी दुबके पड़े थे। समझदारी इसमें है कि निवेश के लिए भावों के गिरने का इंतज़ार किया जाए। तथास्तु में इसका एक जानदार उदाहरण…औरऔर भी

ट्रेडिंग और निवेश की दुनिया एकदम भिन्न है। एक में भावों का ट्रेन्ड पकड़ते हैं। ट्रेन्ड गलत निकले तो मार से बचने के लिए स्टॉप-लॉस लगाकर चलना ज़रूरी है। वहीं, निवेश शेयर के अंतर्निहित मूल्य के आधार पर किया जाता है। बाजार भाव उससे जितना कम होता है, निवेश उतना ही फलदायी होता। कंपनी के मूलभूत कारक मजबूत हैं और शेयर गिर गया तो उसे और ज्यादा खरीदा जा सकता है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अच्छी कंपनियों के शेयर मंथर-मंथर बढ़ते रहते हैं। हमने करीब सवा साल पहले इसी कॉलम में एक मिड-कैप स्टॉक में निवेश की सलाह देते हुए तीन साल में उसके दोगुना होने का आकलन किया था। वो एक साल में ही दोगुना हो गया। अभी अगले दो-तीन साल में उसके कम-से-कम डेढ़ गुना होने की प्रबल संभावना है। इसलिए जो उसमें हैं, बने रहें। बाकी लोग नई खरीद कर सकते हैं। तथास्तु में उसी कंपनी का नया लेखा-जोखा…औरऔर भी