अगर अपने यहां बाज़ार व समाज में आज भी ठगी का बोलबोला है तो इसका मतलब यही है कि बाज़ार का समुचित विकास नहीं हुआ। इसमें ‘चलता है’ का हमारा अंदाज़ बड़ा बाधक है। खाने-पीने का सामान या दवा खरीदते वक्त हम एक्पायरी तिथि तक नहीं देखते। लेकिन विकसित देश बनने की प्रक्रिया में यह जागरूकता बढ़ रही है और उसी के साथ बढ़ रही हैं कुछ कंपनियां। तथास्तु में आज इसी ज़रूरत से उपजी एक कंपनी…औरऔर भी

हमारे बैंकिंग क्षेत्र पर डूबत ऋणों का साया लहरा रहा है। रिजर्व बैंक ने इनके प्रावधान का जो नियम बनाया है, उससे अगले एक साल में बहुत सारे बैंकों का मुनाफा सफाचट हो जाएगा। सबसे बुरा असर सरकारी बैंकों पर पड़ेगा। इनमें से बहुतों का मुनाफा इसी साल 30-70% घट सकता है। निजी क्षेत्र के बैंक भी अनर्जक ऋणों के लपेटे में हैं। लेकिन इनमें से एक बैंक मजबूती से डटा है। आज तथास्तु में वही बैंक…औरऔर भी

बाज़ार अगर जाति-धर्म या पद-पदवी का भेद करे तो चल ही नहीं सकता। इसी के पूरक के बतौर लोकतांत्रिक व्यवस्था निकली है। बाज़ार का ही कमाल है कि आज कोई भी शख्स तमाम बड़ी कंपनियों के मालिकाने का हिस्सा खरीद सकता है। लेकिन यही प्रोत्साहन खेती में गायब है। अगर आप किसान नहीं हैं तो महाराष्ट्र या गुजरात जैसे देश के कई राज्यों में खेती के लिए ज़मीन नहीं खरीद सकते। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

मुंबई में शनिवार से शुरू हुआ मेक इन इंडिया सप्ताह गुरुवार तक चलेगा। एक तरफ हमारी बड़ी कंपनियां मौका देखकर बाहर भागी जा रही हैं, वहीं विदेशियों को भारत में निवेश करने, बनाने व दुनिया को निर्यात करने का न्यौता दिया जा रहा है। लेकिन क्या मोदी सरकार के इस ‘भारत निर्माण’ में हम आम भारतीयों व कंपनियों का कोई योगदान नहीं है? इस पर सोचना ज़रूरी है। अब तथास्तु में आज की एक खांटी देशी कंपनी…औरऔर भी

पैसे से पैसा वही बनाते हैं जो दूसरों के इस लालच का फायदा उठाते हैं। वरना, पैसे से पैसा कभी नहीं बनता। शेयर बाज़ार में निवेश उन्हीं के लिए हैं जो इतना कमाते हैं कि ज़रूरी बचत के बाद भी इतना धन बच जाता है जिसकी उन्हें तत्काल ज़रूरत नहीं होती। वो धन वे मजबूत कंपनियों में लगाते हैं जिनका धंधा बढ़ने पर उनका निवेश फलता-फूलता है। यही मूल सिद्धांत है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

टीवी चैनल पर संपादक बोले – निवेशकों को ग्रोथ वाले सेक्टर की उन कंपनियों में धन लगाना चाहिए जिनका पांच साल का ट्रैक-रिकॉर्ड अच्छा हो। महोदय, हवाबाज़ी के बजाय एक-दो कंपनियां ही बता देते। पिछले ट्रैक-रिकॉर्ड को तो शेयर का भाव सोख चुका है। आगे का क्या? ऐसे ही एक फेसबुकिया मित्र ने लॉन्ग टर्म के लिए 19 कंपनियों के नाम गिना डाले, कर्ज के बोझ से जिनके शेयर डूबे हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

देश में उपभोक्तावाद बढ़ने का शोर है। मगर, सच यह है कि दो-चार प्रतिशत को छोड़ दें तो बाकी भारतीय बड़े किफायती हैं। थोड़े में काम चला लेते हैं। हमारी खपत का स्तर दुनिया के तमाम देशों की तुलना में बहुत कम है। लेकिन थोड़ा देखा-देखी और सांस्कृतिक बदलावों के चलते हमारी खपत का स्तर उठने लगा है। इससे हमारी अर्थव्यवस्था और कंपनियों के लिए संभावनाएं निखरती जा रही है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

बाज़ार फिलहाल ढलान पर है। ठीक पिछले एक साल में बीएसई सेंसेक्स 13.04% गिरा है, जबकि स्मॉल कैप सूचकांक 4.66% ही गिरा है। सेंसेक्स 18.15 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि स्मॉल कैप सूचकांक 56.25 के पी/ई पर। ऐसे में बाज़ार में आगे छोटी कंपनियों के शेयरों का बुलबुला फट सकता है। इसलिए सावधान रहने की ज़रूरत है। पर, अच्छी छोटी कंपनियों के आने का क्रम बना रहता है। ऐसी ही एक अच्छी कंपनी…औरऔर भी

मंगलम ड्रग्स में हमने निवेश की पहली सलाह पांच साल पहले जब 22 नवंबर 2010 को दी थी, तब उसका शेयर 20 रुपए पर था। 1 जनवरी 2015 तक वो वहीं अड़ा रहा। लेकिन वहां से उठा तो 8 दिसंबर तक 20 से सीधे 441 तक पहुंच गया। फिर गिरा तो महीने भर में 261 तक पहुंच गया। फिर भी 2015 में 1205% का सर्वाधिक रिटर्न इसी शेयर ने दिया है। अब आज का तथास्तु…और भीऔर भी

दुनिया-जहान में कुछ भी स्थाई या शाश्वत नहीं। बदलाव ही शाश्वत सच है। हमें दिखे या न दिखे, भौगोलिक परिवेश के साथ ही हमारे निजी व सामाजिक जीवन में बराबर परिवर्तन होते रहते हैं। बदलाव के साथ चलने वाली कंपनियों का ही धंधा निरंतर बढ़ता है। इधर दुनिया डिजिटल होती जा रही है। ‘डिजिटल इंडिया’ पर आगे कुछ सालों में 4.5 लाख करोड़ रुपए खर्च होने जा रहे हैं। आज तथास्तु में डिजिटल लहर पर सवार कंपनी…औरऔर भी