कबाड़ी से धातु सम्राट बने वेदांता समूह के मालिक अनिल अग्रवाल ने सोमवार को लंदन में बाकायदा एलान कर दिया कि वे तेल व गैस भंडार के मामले में भारत की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी केयर्न इंडिया की 51 से 60 फीसदी इक्विटी खरीद रहे हैं। इसमें से 20 फीसदी इक्विटी वेदांता समूह की कंपनी सेसा गोवा ओपन ऑफर के जरिए खरीदेगी। बाकी कम से कम 40 फीसदी इक्विटी वेदांता समूह केयर्न इंडिया की ब्रिटिश प्रवर्तक केयर्नऔरऔर भी

सरकारी कंपनी पावर ग्रिड कॉरपोरेशन बिजली ट्रांसमिशन से जुड़े अपने टावरों की बची जगह टेलिकॉम कंपनियों को लीज पर देने जा रही है। इससे उसे बिना कुछ अतिरिक्त खर्च किए नई आय मिलने लगेगी। इसलिए अब कंपनी का मूल्यांकन नए सिरे से हो सकता है और उसके शेयरों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो सकती है। कंपनी की इस योजना को उसके निदेशक बोर्ड ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह जानकारी खुद कंपनी के चेयरमैन व प्रबंध निदेशकऔरऔर भी

राजस्थान के बाडमेर इलाके में बड़े पेट्रोलियम तेल भंडार की मालिक, केयर्न इंडिया शेयर बाजार से डीलिस्ट हो सकती है। समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीओ) के अनुसार वेदांता समूह केयर्न इंडिया की 51 फीसदी हिस्सेदारी 800-850 करोड़ डॉलर (37250 करोड़ रुपए से 39590 करोड़ रुपए) में खरीदने जा रहा है। इस सौदे की औपचारिक घोषणा अगले हफ्ते सोमवार को हो सकती है। कंपनी में नियंत्रकारी स्थिति हासिल करने के बाद वेदांता समूह केयर्न इंडिया कोऔरऔर भी

अचानक उल्लास और उत्साह के बीच आर्थिक मोर्चे से दो बुरी खबरें मिली हैं। जून महीने में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) की वृद्धि दर 13 महीनों के न्यूनतम स्तर 7.1 फीसदी पर पहुंच गई है। यह पिछले साल जून में आर्थिक सुस्ती के बावजूद 8.3 फीसदी थी। दूसरे, कुछ हफ्तों से इकाई में आ गई खाद्य मुद्रास्फीति की दर 31 जुलाई को खत्म सप्ताह में बढ़कर 11.4 फीसदी हो गई है। हालांकि इन दोनों ही नकारात्मक खबरोंऔरऔर भी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी को निर्देश दिया कि वह 30 सितंबर तक एमसीएक्स-एसएक्स को इक्विटी ट्रेडिंग की इजाजत देने के बारे में दो टूक फैसला करे। साफ-साफ बताए कि वह इसकी इजाजत दे रही है या नहीं और नहीं तो क्यों। साथ ही कोर्ट ने एमसीएक्स-एसएक्स को भी निर्देश दिया कि वह दस दिन के भीतर अपने बोर्ड में प्रस्ताव पास करे कि एक्सचेंज में प्रवर्तकों की शेयरधारिता 5 फीसदी कीऔरऔर भी

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की लिस्टेड कंपनियों को कम से कम 25 फीसदी पब्लिक शेयरधारिता की शर्त से मुक्त कर दिया है। सोमवार को वित्त मंत्रालय की तरफ से इस बात की पुष्टि कर दी गई। इससे पहले छपी खबरों के मुताबिक हाल ही कोल इंडिया के भावी आईपीओ के सिलसिले में हुई बैठक में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि कम से कम साल 2104 तक सरकारी कंपनी को न्यूनतम 25 फीसदी पब्लिक शेयरहोल्डिंगऔरऔर भी

देश में क्रेडिट व डेबिट कार्ड पर अमेरिकी कंपनियों – वीसा और मास्टरकार्ड के एकाधिकार को खत्म करने की तैयारी काफी आगे बढ़ गई है। शुक्रवार को रिजर्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक (भुगतान व समायोजन विभाग) जी पद्मनाभन ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि भारत का अपना इंडियापे कार्ड अगले 18 से 24 महीनों में काम करना शुरू कर देगा। यह खबर आज देश के सबसे बड़े अंग्रेजी आर्थिक अखबार ने लीड के रूप में लगाईऔरऔर भी

अभी तक लिस्टेड कंपनियां अपनी शेयरधारिता का ब्यौरा हर तिमाही के बीतने पर साल में चार बार सार्वजनिक करती रही हैं, भले ही तिमाही के दौरान कितना भी उलटफेर हो जाए। लेकिन अब शेयरधारिता में जब भी कभी दो फीसदी से ज्यादा की घट-बढ़ होगी, उन्हें उसके दस दिन के भीतर स्टॉक एक्सचेजों को सूचित करना होगा और एक्सचेंज इस सूचना को तत्काल अपनी वेबसाइट पर कंपनी की उद्घोषणा के रूप में पेश कर देंगे। यह फैसलाऔरऔर भी

एक तरफ वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी बुधवार को लोकसभा में पक्ष-विपक्ष के सांसदों को समझा रहे थे कि जीएसटी (माल व सेवा कर) के आने से किस तरह पेट्रोलियम पर ज्यादा कराधान से लेकर आम आदमी को परेशान कर रही महंगाई तक की समस्या हल हो जाएगी, वहीं दूसरी तरफ राजधानी में ही राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकारप्राप्त समिति ने अपनी बैठक के बाद जीएसटी से जुडे संविधान संशोधन विधेयक के मौजूदा प्रारूप को खारिज करऔरऔर भी

राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितता के नए-नए खुलासों ने सरकार को देश के भीतर या बाहर कहीं भी मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा है। इसने कांग्रेस आलाकमान को काफी परेशान कर दिया है। उसी के दबाव में खुद प्रधानमंत्री कार्यालय ने कैबिनेट सचिव को खेलों से जुड़े तमाम स्टेडियमों का मुआयना करने का निर्देश दिया है। साथ ही राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति की कार्यकारिणी की विशेष बैठक 5 अगस्त, गुरुवार को बुलाईऔरऔर भी