देश की तीसरी सबसे बड़ी सैनिटरीवेयर कंपनी सेरा सैनिटरीवेयर ने वित्त वर्ष 2009-10 में 31.37 रुपए का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) हासिल किया है, जबकि 2008-09 में उसका ईपीएस 21.15 रुपए था। कंपनी के अन-अंकेक्षित परिणामों के मुताबिक वित्त वर्ष 2009-10 में उसकी बिक्री 20 फीसदी बढ़कर 191.39 करोड़ रुपए हो गई है, जबकि शुद्ध लाभ 49 फीसदी बढ़त के साथ 19.53 करोड़ रुपए हो गया है। इससे पहले वित्त वर्ष 2008-09 में उसकी बिक्री 159.52 करोड़औरऔर भी

हमने गोल्डमैन सैक्स की घटना के साथ ही भारतीय बाजार पर पड़नेवाले उसके प्रभाव की भी जानकारी अलग से दी थी। इस पर घबराने की कोई बात नहीं है और जो लोग बाजार गिरने के अंदेशे में शॉर्ट सौदे करना चाहते हैं, हम उनकी जरा-सा भी परवाह नहीं करते। चाहे कुछ भी हो जाए, निफ्टी आनेवाले वक्त में 6400 के स्तर तक पहुंचेगा। इसलिए बाजार में अभी जिस तरह की छोटी-मोटी गिरावट आ रही है, उसे दरअसलऔरऔर भी

अमेरिका में गोल्डमैन सैक्स के फ्रॉड के उजागर होने का असर आज भारतीय शेयर बाजार पर पड़ सकता है और अनुमान है कि बीएसई सेंसेक्स सुबह के कारोबार में 200-250 अंक नीचे जा सकता है। हालांकि दोपहर-बाद इसमें सुधार आने की संभावना है। इससे पहले रिजर्व बैंक की तरफ से मंगलवार को ब्याज दरों में वृद्धि की चिंता बाजार पर छाई हुई थी। अब इस चिंता में गोल्डमैन सैक्स के मामले ने आग में घी का कामऔरऔर भी

मुझे लग रहा था कि बाजार आज से ही यू-टर्न ले लेगा। एफआईआई के रुख से भी ऐसा लग रहा था। कल जो बिकवाली चली, वह तो रूटीन कामकाज का हिस्सा थी जब एफआईआई और ऑपरेटर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करते हैं जिससे ट्रेडर व निवेशक डर जाएं। और, ऐसा करने में वे सफल भी रहे। मुझे अच्छे-खासे लोगों ने फोन करके कहा कि बाजार बैठने वाला है। दूसरी अफवाह यह चली कि मौद्रिक नीति मेंऔरऔर भी

वाकई यह जानकार बड़ा अफसोस होता है कि हमारे ट्रेडर और यहां तक कि फंड मैनेजर भी बाजार में किस तरह सौदे और निवेश करते हैं। जब टाटा स्टील 150 रुपए पर था, तब मैंने इसमें खरीद की कॉल दी थी और अब यह 700 रुपए पर पहुंच गया है तब भी मेरी धारणा इसके बारे में तेजी की है। ऐसा क्यों? हमने मेटल सेक्टर पर अपनी रिसर्च में, जब स्टील का दाम 21,000 रुपए प्रति टनऔरऔर भी

इनफोसिस ने शानदार नतीजे घोषित किए और नए वित्त वर्ष के लिए संभावनाएं भी अच्छी पेश कीं। हालांकि पहली तिमाही को लेकर कंपनी ज्यादा आशावान नहीं है। इसी के चलते बाजार कमजोरी के साथ खुला। लेकिन जल्दी ही इनफोसिस इससे उबर आया और उसमें भारी मात्रा में कारोबार हुआ। इनफोसिस के नतीजों में ऐसा कुछ खास नहीं है कि उसके स्टॉक के बारे में फिर से रेटिंग की जाए। जैसा कि मैने कल अपने कॉलम में जानकारऔरऔर भी

दुनिया के बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार आज ढीला रहा, इसलिए क्योंकि कारोबारी कल आ रहे इनफोसिस के नतीजों को लेकर कोई दांव नहीं खेलना चाहते। इतना तय है कि महज एक तिमाही में डॉलर के सापेक्ष रुपए के 12 फीसदी बढ़ जाने से भावी नजरिए को बेहतर करना या पिछले स्तर को बरकरार रखना भारी मुश्किल काम है, भले ही यह कंपनी इनफोसिस ही क्यों न हो। हमारे विश्लेषकों के मुताबिक इनफोसिस कल याऔरऔर भी

इनफोसिस टेक्नोलॉजीज के नतीजे आने में बस एक दिन बचा है। कल 13 अप्रैल को इसके नतीजे आएंगे। रुपया जिस तरह मजबूत होता जा रहा है, उसमें आईटी सेक्टर के निवेशक हैरान-परेशान से दिख रहे हैं। कारण, रुपए की मजबूती विदेश से डॉलर में हुई होनेवाली समान आय को कम रुपए में बदल देगी। इन्हीं बातों के मद्देनजर संभावना इस बात की है कि इनफोसिस इस बार बोनस शेयर देने की घोषणा कर सकती है। आधार यहऔरऔर भी

भला आप सोच सकते हैं कि बाजार कैसे चलता है?  कल ग्रीस के संभावित डिफॉल्ट की खबर को हर तरफ अफरातफरी फैलाने में इस्तेमाल किया गया और पूरा बाजार मंदी की गिरफ्त में आ गया। अब, ऐसी चीजें तो होती रहती हैं और आगे भी होती रहेंगी। लेकिन अफरातफरी के माहौल में भी हमने अपना विश्वास बरकरार ही नहीं रखा, बल्कि बाजार में खरीद की कॉल दी। और, बाजार ने भी आज हमारी कॉल का मान रखा।औरऔर भी

बाजार में चर्चा चल निकली है कि अभी दाम ज्यादा चढ़े हुए हैं और अब करेक्शन या गिरावट आने को है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि फौरन ऐसा कुछ होनेवाला है। मैंने ब्लूमबर्ग पर काफी तेज किस्म के एक फंड मैनेजर की टिप्पणी पढ़ी। इसे पढ़ने के बाद मैं मानता हूं कि अभी किसी भी फंड मैनेजर के लिए मंदी या गिरावट की धारणा पाल लेना काफी जल्दबाजी होगी। वो यह गलती सेंसेक्स के 8000 अंक परऔरऔर भी