ग्रीस के ऋण संकट जैसे कई मुद्दों के बीच से गुजरते हुए बाजार (निफ्टी) ने 4800 से 5088 तक का लंबा फासला तय कर लिया। ध्यान दें, ये मुद्दे रोलओवर के ठीक पहले उछाले गए और हल्ला मचाया गया कि अब सेंसेक्स 12,000 तक गिर जाएगा। क्या कहें, अपने यहां यह बराबर का चक्कर बन गया है क्योंकि बाजार को चलाने व नचाने वाले लोग अच्छी तरह जानते हैं कि हमारे स्टॉक एक्सचेंज ऐसे खिलाड़ियों से भरेऔरऔर भी

मैं भी दुनिया के दूसरे विशेषज्ञों से इत्तेफाक रखता हूं कि मंदड़ियों की रैली तेजड़ियों की रैली से ज्यादा दमदार होती है। लेकिन मैं उनकी इस बात से सहमत नहीं हूं कि बाजार अभी मंदड़ियों की गिरफ्त में है। मैं यूरोपीय संकट, अमेरिकी बाजार, भारतीय बाजार और इनको संचालित करनेवाले मूल कारकों से भलीभांति वाकिफ हूं। और, सब कुछ देखने-परखने के बाद भी इस बात पर कायम हूं कि बाजार अभी नई ऊंचाई पर जाएगा। हालांकि यहऔरऔर भी

राठी बार्स को जब हमने 14 अप्रैल को खरीदने की सलाह दी थी, तब बीएसई में उसका भाव 16.15 रुपए था। आज 28 मई को उसका भाव चल रहा है 21.65 रुपए। इस तरह जिन्होंने उस समय इसके शेयर खरीदे होंगे, उन्हें 33 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न मिल रहा है। ऐसे में आप चाहें तो इससे बेचकर निकल सकते हैं क्योंकि डेढ़ महीने में इतना रिटर्न बहुत होता है। हालांकि आप चाहें तो अब भी इसमेंऔरऔर भी

मार्क मोबियस का यह कहना मेरे लिए बड़ा सुकून भरा रहा कि वे पिछले एक महीने से ब्रिक (ब्राजील, रूस, भारत व चीन) देशों में खरीदारी कर रहे हैं। मुझे तसल्ली हुई कि कम से कम मेरा एक चाहनेवाला खुल्लम-खुल्ला मान रहा है कि अनिश्चितता का दौर बाजार में खरीदारी का सबसे अच्छा वक्त होता है। निफ्टी जब 5000 या 5050 अंक पर था, तभी हमने अनुमान जताया था कि वैश्विक संकट के चलते यह 4850 तकऔरऔर भी

इस सेटलमेंट में अब केवल एक दिन बचा है। लेकिन बाजार में और बढ़त आ सकती है केवल इसलिए कि अभी सौदों की स्थिति बहुत ही ज्यादा ओवरसोल्ड वाली है। कल का डर आपकी सोच के दरवाजे बंद कर देता है और आप एक अच्छा मौका गंवा देते हैं। वोलैटिलिटी सूचकांक, इंडिया वीआईएक्स का 20 फीसदी के सामान्य स्तर से एकबारगी 46 फीसदी पर पहुंच जाना ही दिखाता है कि बाजार पर किस हद तक डर छायाऔरऔर भी

टेक्निकल चार्ट के ग्राफ नीचे-नीचे डूब गए तो निवेशकों का भरोसा भी डूब रहा है। पूरे बाजार में डर छा गया है। खरीदार कोई भी नया सौदा करने से डर रहे हैं। निवेशक नफा-नुकसान जो भी, उसी पर बेचकर निकल लेना चाहते हैं। उन्हें बिजनेस चैनलों पर जिस तरह हर तरफ हताशा-निराशा दिखाई जा रही है, उसके अलावा कुछ नहीं दिख रहा। यूरोप के बाजार हर दिन खुलने पर धराशाई हो रहे हैं। अमेरिकी बाजार इन्हीं केऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के मसले ने बाजार को भारी आवेग दिया। इसके चक्कर में ट्रेडर ऊंचे भावों पर भारी-भरकम खरीद के सौदे कर बैठे। इसका नतीजा यह हुआ कि बाजार खुद को ऊंचे स्तर पर टिकाए नहीं रख सका। बीएसई सेंसेक्स दिन में 263.12 अंक बढ़ गया था, लेकिन बंद हुआ केवल 23.94 अंक की बढ़त के साथ। दोनों अंबानी भाइयों की कंपनियों के शेयर कारोबारियों के पसंदीदा बने रहे। आरआईएल 1049 तक उठने के बाद 2.58औरऔर भी

समय रहते कदम उठाना जरूरी होता है। सांप के गुजर जाने के बाद लाठी पीटने में क्या फायदा। आग बुझ गई तब फायर ब्रिगेड का क्या काम। मानसून बीत जाने के बाद बाढ़ का पानी मांगने का क्या तुक। मरीज की हालत जब नाजुक हो तभी उसे तुरंत इलाज चाहिए होता है। इसी तरह जब सेल खत्म हो जाए तो आप 30 फीसदी के भारी डिस्काउंट की मांग नहीं सकते। डर का कोई अंत नहीं है। आपकोऔरऔर भी

मैंने आपसे बोला था कि ओएनजीसी एक ही सत्र में 100 रुपए बढ़ जाएगा और प्राकृतिक गैस के मूल्य (एपीएम) पर सरकार के फैसले ने ऐसा कर दिखाया। ओएनजीसी का शेयर बीएसई में 112.50 रुपए तक बढ़ गया। हालांकि बंद हुआ 89.70 रुपए बढ़कर 1118.20 रुपए पर। बढ़ती अनिश्चितता के बीच भी निवेशक बने रहना बहादुरी का काम है। असल में समझदार लोगों को ऐसे दौर में खरीद करनी और बढ़ानी चाहिए। दिक्कत है कि शेयर बाजारऔरऔर भी

अमेरिका में कंपनियों के नतीजे आने का दौर बीत गया और एस एंड पी इंडेक्स में शामिल कंपनियों की आय 17 फीसदी बढ़ी है, जबकि उम्मीद 14 फीसदी की ही थी। वहां बेरोजगारी की दर घटना शुरू हो गई है और हाउसिंग क्षेत्र में मांग बढ़ रही है। इस तरह अमेरिकी अर्थव्यवस्था उठान पर है और ग्रीस का संकट अमेरिका को आगे बढ़ने में मददगार होगा। भारतीय कंपनियों की भी आय अभी तक उम्मीद से बेहतर रहीऔरऔर भी