शेयर बाजारों में लिस्टेड या सूचीबद्ध कंपनियों को अब हर छह महीने पर बताना होगा कि उनकी आस्तियों और देनदारियों (एसेट व लायबिलिटीज) की स्थिति क्या है। यह जानकारी उन्हें अपने छमाही नतीजों में अलग से एक नोट में देनी होगी। सभी स्टॉक एक्सचेजों के नाम आज जारी किए गए एक सर्कुलर में पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने यह फैसला सुनाया है। सेबी ने स्पष्ट किया है कि हर छमाही बीतने केऔरऔर भी

बाजार की गति बतानेवाला बीएसई सेंसेक्स आज 17,935 अंक पर बंद हुआ। यह अब 18,000 के स्तर से कुछ ही फासले पर है। आनेवाले हफ्तों में यह 18,300 अंक के पार जा सकता है। टाटा स्टील 680 रुपए पर जा पहुंचा तो स्टरलाइट 865, सैंडुर 760, विंडसर 47, विमप्लास्ट 184, शिवालिक 33, बालासोर 28, आरडीबी 118, एसएनएल 42, जमना ऑटो 89 और एनआरबी 78 रुपए तक चला गया। बढ़त का दौर ऐसे ही चला। फिर भी बहुतऔरऔर भी

यह किसी आम आदमी का नहीं, बल्कि हिंदुस्तान टाइम्स समूह के बिजनेस अखबार मिंट के डिप्टी एडिटर स्तर के खास आदमी का मामला है। उनका नाम क्या है, इसे जानने का कोई फायदा नहीं। लेकिन उनके साथ घटा वाकया जानने से बीमा उद्योग का ऐसा व्यावहारिक सच हमारे सामने आता है जो साबित करता है कि इस उद्योग में निहित स्वार्थों का ऐसा नेक्सस बना हुआ है जिसका मकसद बीमा उद्योग या कंपनी का विकास नहीं, बल्किऔरऔर भी

देश में अंग्रेजों के जमाने के रिवाजों व कानूनों को बदलने का मन बनने लगा है। पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने शुक्रवार को भोपाल में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट के दीक्षांत समारोह में पहनी जानेवाली ड्रेस को बर्बर औपनिवेश रिवाज बताते हुए उतार फेंका तो उसके एक दिन पहले गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक के प्लैटिनम जुबली समारोह में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि देश में वित्तीय क्षेत्र को चलानेवाले ज्यादातर कानून पुराने पड़औरऔर भी

मुझे अपने स्तर पर पता है कि बाजार के एक स्मार्ट ऑपरेटर ने निफ्टी में 5300 के स्तर पर कुछ शॉर्ट सौदे किए हैं। हालांकि वह तमाम शेयरों के साथ ही बाजार में तेजी आने की धारणा रखता है। असल में उसने शॉर्ट कॉल महज इसलिए दी है क्योंकि वह जांचना चाहता है कि निफ्टी में 5350 पर कोई रुकावट बन रही है या नहीं। उसे खुद लगता है कि अगले 12 महीनों में निफ्टी 7000 तकऔरऔर भी

देश के शेयर बाजारों में सूचीबद्ध 27 फीसदी कंपनियों में पिछले कई महीनों से कोई कारोबार नहीं हो रहा है। इनमें से ज्यादातर कंपनियों के प्रवर्तक अपने शेयर पहले ही बेचकर निकल चुके हैं। लेकिन लाखों आम निवेशक इनमें से ऐसा फंसे हैं कि न उनसे उगलते बन रहा है और न ही निगलते। करोड़ों के इस गड़बड़झाले पर न तो सेबी का कोई ध्यान है और न ही कॉरपोरेट मामलात इसे तवज्जो दे रहा है। बॉम्बेऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2009-10 गुजर गया। लेकिन यह साल जाते-जाते शेयर बाजार के निवेशकों की पूंजी दोगुनी करके गया है। अगर लिस्टेड कंपनियों के शेयर भावों को आधार बनाएं तो बाजार का पूंजीकरण अब 60 लाख करोड़ रुपए का स्तर पार गया है जो पिछले साल के स्तर से लगभग दोगुना है। हालांकि ये सारा सांकेतिक मामला है। लेकिन मानने में क्या हर्ज है कि भारतीय निवेशक पहले से दोगुने अमीर हो गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) मेंऔरऔर भी

देश का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई नए वित्त वर्ष में अपनी पहुंच देश के दूरदराज के इलाकों तक बढ़ाने के लिए 15,000 नए बैंकिंग संवाददाताओं (बीसी) की नियुक्ति करेगा। यह जानकारी खुद बैंक के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक ओ पी भट्ट ने एक प्रमुख अंग्रेजी आर्थिक अखबार से हुई बातचीत में दी। इससे बैंक ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ मजबूत करना चाहता है। बैंकिंग संवाददाता को बढ़ाना वित्तीय समावेश को व्यापक बनाने के लक्ष्य का एक हिस्साऔरऔर भी

नए वित्त वर्ष के पहले दिन 1 अप्रैल को रात 12 बजे से ही दिल्ली और मुंबई समेत देश के 13 बड़े शहरों में पेट्रोल व डीजल 50 पैसे प्रति लीटर तक महंगा हो गया है। इन शहरों में आज से यूरो-चार ग्रेड का पेट्रोल व डीजल सप्लाई किया जाएगा। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 50 पैसे बढ़कर 47.93 रुपए प्रति लीटर और डीजल 26 पैसे बढ़कर 38.10 रुपए प्रति लीटर हो गया है।औरऔर भी

नए वित्त वर्ष 2010-11 का पहला दिन बैंकों में अपना पैसा बचत खाते में रखनेवाले करोड़ों आम लोगों के लिए शानदार तोहफा लेकर आया है। इस खाते पर ब्याज की दर तो पहले की तरह 3.5 फीसदी सालाना ही है। लेकिन अब इसे हर दिन के बैलेंस पर गिना जाएगा, जबकि अभी तक बैंक महीने की 10 तारीख और आखिरी तारीख तक खाते में सबसे कम बैलेंस राशि पर ब्याज देते रहे हैं। इसलिए पहले जहां बचतऔरऔर भी