कहा जाता है कि झगड़े में किसी का फायदा नहीं होता है। लेकिन यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी (यूलिप) को लेकर सेबी व इरडा के बीच छिड़ी जंग से इंश्योरेंस ग्राहकों का फायदा ही हो रहा है। पिछले कुछ समय से बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (इरडा) ने यूलिप को बेहतर करने की ठान ली है। इरडा ने एक नई पहल के जरिए जीवन बीमा कंपनियों के पेंशन प्लान का आकर्षण भी बढ़ाया है। आगामी 1 जुलाई सेऔरऔर भी

टर्म इंश्योरेंस वास्तव में बेसिक इंश्योरेंस है। बीमा के अन्य रूप मसलन – यूलिप, मनी बैक, ग्रुप इंश्योरेस, मेडिकल इंश्यारेंस, वाहन बीमा, पेंशन प्लान तो काफी बाद में आए। इन सबका उद्गम टर्म इंश्योरेंस है। ध्यान रहे कि बीमा व निवेश या बचत दोनों बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं। इन दोनों को एक चश्में से नहीं देखा जाना जाहिए क्योंकि निवेश व बचत के जहां कई एवेन्यू यानी तरीके हैं वहीं बीमा का तरीका सिर्फ एक ही है।औरऔर भी

बाजार कभी नहीं मरता है। मरता है आपका वो विश्वास जो फंडामेंटल्स या मूलाधार के बेजान-बेमानी हो जाने से खंड-खंड बिखर चुका होता है। टेक्निकल एनॉलिस्ट अक्सर उसी वक्त बिक्री की कॉल देते हैं जब सब कुछ पहले से धराशाई हो चुका होता है और खरीदने को तब कहते हैं जब कल की बात कोई सोच ही नहीं रहा होता। ऐसे माहौल में डर हावी हो जाता है और निवेशक इस तरह लुटते हैं जैसे वे पैदाऔरऔर भी

“सिंगापुर निफ्टी सूचकांक (एसजीएक्स सीएनएक्स) 5105 पर। मंदड़िए अपने को साबित करने और दोहरी तलहटी बनाने के लिए निफ्टी को 5040 तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। बाजार की हर डुबकी का इस्तेमाल निचले भावों पर खरीद में करें। मजबूत भरोसे के अभाव के चलते मेटल शेयरों पर चोट की जानी पक्की है।” यह वो संदेश है जो हमने गुरुवार को बाजार खुलने से पहले जारी किया था। वैसे, अगर यह इक्विटी बाजार है तो इसमें दो तरहऔरऔर भी

वित्त वर्ष 2010-11 के पहले महीने में बैंकों के कर्ज और जमा दोनों की रफ्तार बेहद धीमी रही है। 27 मार्च से 9 अप्रैल तक तो बैंकों की कुल जमा में 43,500 करोड़ की बढ़त हो गई थी। वह भी तब जब सावधि जमा में 79,963 करोड़ रुपए की वृद्धि ने बचत व चालू खाते में जमाराशि में आई 36,643 रुपए की कमी को संभाल लिया था। लेकिन इसके बाद 10 अप्रैल से 23 अप्रैल तक केऔरऔर भी

हां, इसे आप राहत और सुकून की रैली कह सकते हैं। अब कहा जा सकता है कि हर बढ़त पर आपको बेच लेना चाहिए। यही बात तो चार्ट हर समय फेंकते रहते हैं। निवेशकों व ट्रेडरों को चक्र के अंत में बेचने की सलाह दी जाती है। खैर, जैसी कि उम्मीद थी निफ्टी 5120 अंक के ऊपर बंद हुआ। फिलहाल, कोई कहासुनी नही क्योंकि वक्त ही हमें बतलाएगा कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। आजऔरऔर भी

भारतीय रिजर्व बैंक धीरे-धीरे रुपए को पूंजी खाते में परिवर्तनीय बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसके तहत एक तो उसने तय किया है कि अब विदेशी यात्रा पर जाने पर कोई भारतीय नागरिक 2000 डॉलर के बजाय 3000 डॉलर ले सकता है। यह रकम लीबिया, इराक, ईरान, रूसी संघ और सीआईएस देशों के लिए पहले से 5000 ड़ॉलर है जिसे जस का तस रखा गया है। दूसरे, अभी तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मेंऔरऔर भी

आज का दिन स्टॉप लॉस के नाम रहा। निफ्टी 5200 अंक के नीचे पहुंचा तो हर तरफ सौदे काटने का सिलसिला चल निकला। चीन ने ब्याज दरें बढ़ा दी थीं और ऑस्ट्रेलिया ने मेटल के दाम। इसलिए दुनिया के बाजारों में पहले से ही थोडी कमजोरी का आलम था। बाजार को तब सदमा-सा लग गया जब ग्रीस ने कह दिया कि उसके लिए 110 अरब यूरो की रकम शायद काफी न पड़े। हमारे लिए इसका क्या मतलबऔरऔर भी

बाजार में अगर 170 अंक का करेक्शन आया तो यह कोई दुनिया से अलहदा बात नहीं थी क्योंकि दुनिया के बाजारों में इससे ज्यादा गिरावट आई है। एक बार फिर देखा गया कि बाजार गिरने के अंदेशे में लोग शॉर्ट सौदे करने लगते हैं, बगैर इसकी परवाह किए कि अभी देश में कितनी बढ़त और खरीद की संभावना है। चीन अपना सीआरआर (बैंकों की जमा का वह हिस्सा जो उन्हें देश के केंद्रीय बैंक के पास नकदऔरऔर भी

आप में और मुझ में क्या अंतर है? मैं जो हो रहा है, उसे देखता हूं, समझता हूं और उसके हिसाब से सलाह देता हूं, जबकि आप सलाह मिलने के बाद भी वही करते हैं जो स्क्रीन बताता है। थोड़े में कहूं तो आपको अपने ही ऊपर भरोसा नहीं है। जब बाजार 300 अंक गिर गया तो आप निचले भावों पर खरीद के बजाय बाजार के दबाव में आ गए और घाटा खाकर भी शेयर बेच डाले।औरऔर भी