पिछले महीने पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी की तरफ से यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) पर कसे गए शिकंजे ने लगता है हमारी बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) को झकझोर कर रख दिया है। अब वह एक-एक कर ऐसे कदम उठा रही है जो सेबी की तरफ से उठाए गए एतराज का जवाब लगते हैं। इरडा ने यूलिप उत्पादों व कालातीत या लैप्स हो चुकी पॉलिसियों को लेकर नया रेगुलेशन लाने की पेशकश की है। इसमें खासऔरऔर भी

जब भी कभी बाजार गिरता है और हर तरफ से बेचो-बेचो की पुकार आने लगती है तब मैं बाजार के बर्ताव और निवेशकों व ट्रेडरों के मनोविज्ञान पर मुस्कुराने लगता हूं। ऐसा लेहमान ब्रदर्स के दीवालिया होने की खबर के बाद भी हुआ था, जब बाजार में जबरदस्त बिकवाली चली थी। असल में आप इसी तरह हवा में बहकर बाजार को नीचे-नीचे पहुंचा देते हैं और दूसरों को अपने ऊपर सवारी गांठने का मौका दे देते हैं।औरऔर भी

बाजार की दिशा का अनुमान लगाने में हम ज्यादा गलत नहीं थे। हां, शुक्रवार को हम गलत निकले क्योंकि वैश्विक बाजारों का असर हावी हो गया। लेकिन सोमवार के रुझान के लिए वैश्विक कमजोरी को वजह बताने का क्या तुक है? जैसा मैं हमेशा से मानता रहा हूं कि जब बाजार अपनी तलहटी पर होता है तभी चार्ट के धंधे और टेक्निकल सलाह वाले लोग बिक्री की सलाह दे डालते हैं। और, फिर वैश्विक बाजारों के असरऔरऔर भी

जेनबर्क्ट फार्मास्यूटिकल्स का शेयर शुक्रवार को 71.75 रुपए तक जाकर 52 हफ्तों के शिखर पर पहुंच गया। लेकिन बंद हुआ तो गुरुवार के बंद भाव 68.30 रुपए से 4.69 फीसदी गिरकर 65.10 रुपए पर। यह कंपनी केवल बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड है। इसका शेयर बी ग्रुप में है और इसका अंकित मूल्य 10 रुपए है। पिछली चार तिमाहियों के वित्तीय परिणामों के आधार पर इसका टीटीएम (ट्रेलिंग ट्वेल्व मंथ) ईपीएस 7.51 रुपए है। इस तरह मौजूदाऔरऔर भी

बैंकिंग व फाइनेंस की दुनिया बड़ी विचित्र होती है। इसी साल 24 फरवरी को देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन ओ पी भट्ट ने कहा था कि बैंक को अगले पांच सालों में लगभग 40,000 करोड़ रुपए जुटाने की जरूरत पड़ेगी। अब वही भट्ट साहब कह रहे हैं कि बैंक के पास 40,000 करोड़ रुपए का कैश इफरात पड़ा है जिसे बैंक कहीं लगा नहीं पा रहा है। कोई कह सकता हैऔरऔर भी

एमसीएक्स स्टॉक एक्सचेंज (एमसीएक्स-एसएक्स) ने भारत के दो पेशेवर संस्थानों इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ  इंडिया (आईसीएसआई) और इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड वर्क्स एकाउंटेंट ऑफ इंडिया (आईसीडब्ल्यूएआई) के साथ मिलकर वित्तीय साक्षरता व कॉरपोरेट गवर्नेंस के प्रोत्साहन के लिए समझौता किया है। एमसीएक्स-एसएक्स ने कोलकाता में 7 मई को कंपनी मामलात मंत्रालय द्वारा आयोजित एक समारोह में इस करार पर हस्ताक्षर किए। एमसीएक्स-एसएक्स इस तरह का करार इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के साथ पहलेऔरऔर भी

मानसून की हालत पर मौसम विभाग का बयान, यूबीएस बैंक द्वारा कमोडिटी को डाउनग्रेड किया जाना, कमजोर यूरो और इसके ऊपर से शुक्रवार से निजात पाने की मानसिकता। ऐसी ही तमाम बातें निवेशकों के दिमाग पर हावी रहीं। शहर में एक तरह का डर छाया हुआ है। दलाल पथ में भी भरोसा एकदम निचले पायदान पर पहुंच चुका है। ज्यादातर ट्रेडर और निवेशक पहले ही बाजार से बाहर जा चुके हैं। आज तो एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुल्स)औरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंडों को निवेशकों के बीच लोकप्रिय बनाने की ठान ली है। इसी कोशिश के तहत उसने तय किया है कि अब म्यूचुअल फंडों को निवेशकों से मिली शिकायतों का पूरा कच्चा-चिट्ठा अपनी व एम्फी (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) की वेबसाइट के साथ अपने सालाना रिपोर्ट में भी प्रकाशित करना होगा। सेबी ने एक नए सर्कुलर में यह व्यवस्था दी है। सेबी का कहनाऔरऔर भी

मेरा आपको सुझाव है कि कुछ समय निकालें और कंपनी व बाजार के बारे में उपलब्ध कराई जा रही रिसर्च का अध्ययन करें। जैसे, आज हम इस कॉलम के अंत में कावेरी टेलिकॉम की रिसर्च रिपोर्ट पेश कर रहे हैं। हम इस तरह की विशेष जानकारियां उपलब्ध कराते रहते हैं। इनके अध्ययन से भारत के साथ-साथ दुनिया के बाजारों के बर्ताव को लेकर आपके जो भ्रम हैं, उनमें से ज्यादातर दूर हो सकते हैं। अगर फिर भीऔरऔर भी

मैं लगातार इस बात पर कायम हूं कि भारत सचमुच विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के लिए जबरदस्त आकर्षण का स्रोत बना हुआ है। यूरोप के ऋण संकट ने विदेशी पूंजी के प्रवाह को भारत की तरफ मोड़ा है। यह बात पिछले कुछ दिनों में वित्त मंत्रालय के आला अधिकारी भी स्वीकार कर चुके हैं। जिस तरह कल भारतीय रिजर्व बैंक ने इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए विदेशी वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) की शर्तों में ढील दी और गवर्नर डी सुब्बारावऔरऔर भी