सरकार मानसून की बारिश और चीनी उत्पादन के आकलन के बाद चीनी वायदा पर लगी रोक को हटाने पर विचार करेगी। यह बात खुद केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कही है। उन्होंने दो दिन पहले बुधवार को दिल्ली की आजादपुर मंडी में जिसों के भाव का लाइव टिकर शुरू करने के मौके पर यह बात कही है। हालांकि इसके बाद कमोडिटी बाजार के नियामक फॉरवर्ड मार्केट कमीशन (एफएमसी) के चेयरमैन बी सी खटुआ ने कहा हैऔरऔर भी

सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) को शुरुआती दो सालों में मिली सफलता से इतनी उत्साहित है कि वह इसके दायरे में गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों को भी लाने पर विचार कर रही है। यह जानकारी आज श्रम व रोजगार मंत्रालय में श्रम कल्याण विभाग के महानिदेशक अनिल स्वरूप ने दी। वे नई दिल्ली में फिक्की द्वारा स्वास्थ्य बीमा पर आयोजित एक वर्कशॉप में बोल रहे थे। अभी यह योजना केवल गरीबी रेखा के नीचेऔरऔर भी

इस बार अक्षय तृतीया रविवार, 16 मई को पड़ रही है। इसलिए दोनों ही स्टॉक एक्सचेंजों, बीएसई और एनएसई ने इस दिन केवल गोल्ड ईटीएफ में ट्रेडिंग के लिए बाजार को सुबह 9 बजे से लेकर शाम 3.30 बजे तक खुला रखने का फैसला किया है। लेकिन ध्यान रहे कि इस विशेष सत्र में केवल गोल्ड ईटीएफ में ही ट्रेडिंग होगी, बाकी किसी भी प्रतिभूति में नहीं। अभी सात गोल्ड ईटीएफ शेयर बाजारों में लिस्टेड हैं। येऔरऔर भी

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2010 में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 9.59 फीसदी दर्ज की गई है, जबकि ठीक इसके पहले मार्च 2010 में यह 9.90 फीसदी थी। साल भर पहले अप्रैल 2009 में मुद्रास्फीति की दर केवल 1.31 फीसदी थी। अप्रैल में मुद्रास्फीति की दर में आई कमी की खास वजह फलों, प्याज, गेहूं और अन्य अनाजों के थोक भावों का घटना है। जैसे, आलू के भावऔरऔर भी

इस समय सब-ब्रोकर भले ही किसी न किसी ब्रोकर के साथ जुड़ कर काम करते हैं। लेकिन उनका स्वतंत्र वजूद होता है। पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के पास उन्हें पंजीकरण कराना पड़ता है। लेकिन अगर सेबी की विशेषज्ञ समिति की सिफारिश मान ली गई तो पूंजी बाजार के मध्यवर्ती के रूप में सब ब्रोकर के नाम को ही खत्म कर दिया जाएगा और वे ब्रोकरों के एजेंट या कर्मचारी बन कर रह जाएंगे। सेबी ने पूंजीऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंडों को निवेशकों के बीच लोकप्रिय बनाने की ठान ली है। इसी कोशिश के तहत उसने तय किया है कि अब म्यूचुअल फंडों को निवेशकों से मिली शिकायतों का पूरा कच्चा-चिट्ठा अपनी व एम्फी (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) की वेबसाइट के साथ अपने सालाना रिपोर्ट में भी प्रकाशित करना होगा। सेबी ने एक नए सर्कुलर में यह व्यवस्था दी है। सेबी का कहनाऔरऔर भी

बैंकों को हर साल अपने कर्ज का 18 फीसदी हिस्सा कृषि क्षेत्र को देना होता है। इसमें से भी 13.5 फीसदी कर्ज सीधे किसानों को दिया जाना चाहिए। नए साल में कर्ज की राशि बीते वित्त वर्ष 31 मार्च तक वितरित रकम के आधार पर निकाली जाती है। बैंकों के लिए यह लक्ष्य पूरा कर पाना हमेशा मुश्किल होता है। जैसे, 2009-10 में गांवों तक पहुंच रखनेवाला बैंक ऑफ बड़ौदा तक 17 फीसदी ही कृषि ऋण देऔरऔर भी

ऋण संकट में फंसे यूरोपीय संघ की आर्थिक वृद्धि दर चालू साल 2010 की पहली तिमाही में 0. 2 फीसदी रही है। इसके साथ ही स्पेन लगभग दो साल बाद मंदी से बाहर आ गया है। यूरो जोन में 16 ऐसे देश आते हैं, जिन्होंने एकल मुद्रा के रूप में यूरो को अपना रखा है। पिछले साल की चौथी तिमाही में यूरो जोन की आर्थिक वृद्धि दर 0. 3 फीसदी रही थी। आर्थिक विकास दर के जनवरी-मार्चऔरऔर भी

बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) ने बीमा एजेंटों की ऑनलाइन ट्रेनिंग में हो रही गड़बड़ियों को रोकने के लिए कई सख्त नियम बना दिए हैं। इसमें खास बात यह है कि उम्मीदवार के पास अपना ईमेल आईडी व मोबाइल होना जरूरी है और हर सत्र यानी चार घंटे की ट्रेनिंग के बाद उसे नया पासवर्ड दिया जाएगा जो उसे एसएमएस से सूचित किया जाएगा। बीमा नियामक संस्था ने बुधवार को ऑनलाइन एजेंट ट्रेनिंग इस्टीट्यूट्स के लिए जारीऔरऔर भी

देश में औद्योगिक उत्पादन की दर लगातार छह महीनों से दहाई अंकों में बनी हुई है। सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2010 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 13.5 फीसदी बढ़त दर्ज की गई है। पूरे वित्त वर्ष 2009-10 की बात करें तो आईआईपी की वृद्धि दर 10.4 फीसदी रही है। पिछले वित्त वर्ष 2008-09 में वैश्विक मंदी के कारण यह दर केवल 2.8 फीसदी रह गई थी। हालांकि मार्च की औद्योगिक वृद्धिऔरऔर भी