ऋण संकट से जूझ रहा ग्रीस साल 2013 इससे निजात पा लेगा और उनकी राजकोषीय व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी। वह यूरोप की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से पहले ऐसा करने में कामयाब होगा। दूसरी तरफ जापान में 2084 तक और इटली में 2060 तक सरकारी ऋण बड़ी समस्या बना रहेगा। यह निष्कर्ष है स्विटजरलैंड के मशहूर बिजनेस स्कूल आईएमडी की तरफ से आज, बुधवार को जारी की गई अध्ययन रिपोर्ट का। रिपोर्ट का आकलन है कि अमेरिका 2033औरऔर भी

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने छह और कंपनियों को अपने फ्यूचर्स व ऑप्शंस (एफ एंड ओ) सेगमेंट में ट्रेडिंग के लिए शामिल कर लिया है। ये कंपनियां हैं एक्साइड, गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, जिंदल साउथवेस्ट होल्डिंग्स, रुचि सोया, शोभा डेवलपर्स और हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज। अभी तक एनएसई के एफ एंड ओ सेगमेंट में 190 कंपनियों के डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग होती रही है। अब इनकी संख्या बढ़कर 196 हो जाएगी। एनएसई ने अभी तक यह नहीं बताया कि छहऔरऔर भी

देश में आवश्यक दवाओं के मूल्य पर नियंत्रण रखनेवाली संस्था एनपीपीए (नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी) ने दवा कंपनियों से 65 अवयवों के दाम का विवरण मांगा है। इन अवयवों में चीनी, स्टार्च, लैक्टोज व कोटिंग्स शामिल हैं। इनके दाम के प्रभाव का पिछला आकलन 2007 में किया गया। नए दामों के हिसाब से मूल्य का निर्धारण सितंबर 2010 तक पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है। एनपीपीए उन दवाओं के मूल्य पर नियंत्रण रखता है जिनको बनानेऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने रवा, मैदा और आटा जैसे गेहूं उत्पादों के निर्यात की मंजूरी को एक और साल के लिए 31 मार्च 2011 तक के लिए बढ़ा दिया है। असल में विदेश में रह रहे भारतीयों में इनकी बहुत मांग रहती है और उन्हें ये चीजें विदेशी उत्पादकों की तरफ से नहीं मिलती हैं। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने जारी की गई एक अधिसूचना में कहा कि गेहूं उत्पादों का निर्यात की अनुमति 6.50 लाख टन तकऔरऔर भी

पिछले महीने पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी की तरफ से यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) पर कसे गए शिकंजे ने लगता है हमारी बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) को झकझोर कर रख दिया है। अब वह एक-एक कर ऐसे कदम उठा रही है जो सेबी की तरफ से उठाए गए एतराज का जवाब लगते हैं। इरडा ने यूलिप उत्पादों व कालातीत या लैप्स हो चुकी पॉलिसियों को लेकर नया रेगुलेशन लाने की पेशकश की है। इसमें खासऔरऔर भी

बैंक ऑफ राजस्थान ने आज बाकायदा तय कर लिया कि वह आईसीआईसीआई बैंक में अपना विलय करेगा। विलय के स्वरूप का फैसला दोनों बैंकों के निदेशक बोर्ड अपनी-अपनी बैठकों में करेंगे। आईसीआईसीआई बैंक देश में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक है और वह पहले भी बैंक ऑफ राजस्थान को लेने की पेशकश कर चुका है। लेकिन उस समय बैंक ऑफ राजस्थान के प्रवर्तकों ने कुछ ज्यादा ही दाम मांग लिया था। विलय पर दोनों बैंकों केऔरऔर भी

आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ व प्रबंध निदेशक चंदा कोचर का एचआरए (हाउस रेंट एलाउंस) 1 अप्रैल, 2010 से 2.50 लाख रुपए प्रति माह कर दिया गया है। इसके ऊपर से मकान के रखरखाव व फर्नीचर वगैरह का खर्च भी बैंक उठाएगा। कोचर को एचआरए व मकान संबंधी अन्य सुविधाएं तब मिलेंगी, जब वे बैंक द्वारा दिए गए आवास में नहीं रहती हैं। इससे पहले तक उनका एचआरए 1 लाख रुपए प्रति माह था। उनका वेतन 13.5 लाखऔरऔर भी

केंद्र सरकार देश भर में निवेशकों के बीच जागरूकता बढ़ाने की मुहिम चलाने जा रही है। इसके तहत जुलाई के दूसरे हफ्ते में ‘इंडिया इनवेस्टर वीक’ मनाया जाएगा। यह पहल कॉरपोरेट मामलात मंत्रालय की तरफ से की जा रही है और इसकी केंद्रीय विषयवस्तु है – जानकार निवेशक, कॉरपोरेट भारत की संपदा (इनफॉर्म्ड इनवेस्टर – ऐन एसेट फॉर कॉरपोरेट इंडिया)। सोमवार को नेशनल फाउंडेशन फॉर कॉरपोरेट गवर्नेंस (एनएफसीजी) की संचालन परिषद की बैठक में कॉरपोरेट मामलात मंत्रीऔरऔर भी

न रक्षा मंत्रालय ने इसकी मांग की, न कोई उद्योग संगठन इस हद तक गया। फिर भी हमारे वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने प्रस्ताव पेश कर दिया कि क्यों न रक्षा उत्पादन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा 26 फीसदी के मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 74 फीसदी कर दी जाए। तर्क यह है कि हम आज भी अपना 70 फीसदी रक्षा साजोसामान विदेश से आयात करते हैं। 74 फीसदी एफडीआई से यही उत्पादन देश में होनेऔरऔर भी

विदेशी मुद्रा के डेरिवेटिव सौदे इसीलिए होते हैं कि आयातक-निर्यातक डॉलर से लेकर यूरो व येन तक की विनिमय दर में आनेवाले उतार-चढ़ाव से खुद को बचा सकें और डेरिवेटिव सौदे कराने का काम मुख्य रूप से हमारे बैंक करते हैं। लेकिन अगस्त 2006 से अक्टूबर 2008 के दौरान जब रुपया डॉलर के सापेक्ष भारी उतार-चढ़ाव का शिकार हुआ, तब बैंकों ने हमारे निर्यातकों को ऐसे डेरिवेटिव कांट्रैक्ट बेच दिए जिनसे उनको तो फायदा हो गया, लेकिनऔरऔर भी