पूंजी बाजार के शोध व सलाह से जुड़ी व बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनी सीएनआई रिसर्च ने अपने को नए सिरे से ढाला है। उसने अपनी रीस्ट्रक्चरिंग और रीब्रांडिग की है। इसी क्रम में वह अपनी दो वेबसाइटों को मिलाकर एक नई वेबसाइट पर ले आई है। अब बाजार के आंकड़ों व सूचनाओं से जुड़ी उसकी वेबसाइट सीएनआई इनफोएक्सचेंज (cni infoxchange) की सारी सामग्री भी मूल वेबसाइट पर आ गई है। कंपनी की नई वेबसाइट काऔरऔर भी

उद्योग को परेशान करनेवाली मुद्रास्फीति की दर मई महीने में फिर दहाई अंक में पहुंच गई है। केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर मई 2010 में 10.16 फीसदी रही है। यह अनंतिम अनुमान है और अंतिम अनुमान इससे ज्यादा हो सकता है। मार्च में मुद्रास्फीति का अनंतिम अनुमान 9.90 फीसदी का, लेकिन अंतिम आंकड़ा 11.04 फीसदी निकला है। अगले माह जुलाई में अप्रैलऔरऔर भी

रिलायंस के औद्योगिक साम्राज्य के बंटवारे से मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी के व्यावसायिक ही नहीं, पारिवारिक रिश्तों में आई दरार भी अब मिटने लगी है। दोनों भाई सायास इसकी कोशिश में लगे हैं। इस बात का अंदाजा दोनों परिवारों की हाल की दक्षिण अफ्रीका यात्रा के दौरान साथ-साथ बिताए लमहों से लगाया जा सकता है। समाचार एजेंसी ‘भाषा’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते हफ्ते मुकेश और अनिल अंबानी ने अपने.अपने परिवारों के साथ दक्षिण अफ्रीकाऔरऔर भी

हमारे यहां अभी तक का चलन यही है कि बीमा खरीदा नहीं जाता बल्कि यह बेचा जाता है। लिहाजा बीमा एजेंट जहां भावी ग्राहकों को आधी-अधूरी जानकारियां देता है वहीं कॉरपोरेट एजेंट से भी ग्राहकों को काफी शिकायतें हैं। बीमा पॉलिसी की ऑनलाइन खरीदारी का रास्ता कांटों से भरा हुआ है तो टेलीसेल्स यानी टेलीफोन के जरिए बीमा उत्पादों की बिक्री की प्रक्रिया से ग्राहक समुदाय नाखुश है। शिकायतें बहुत: एक अनुमान के अनुसार भारतीय बीमा उद्योगऔरऔर भी

अभी रिलायंस समूह के दोनों धड़ों में 23 मई को नो-कम्पीट करार के खात्मे की घोषणा को महीने भर भी नहीं बीते हैं कि मुकेश अंबानी ने बड़े पैमाने पर दूरसंचार सेवाओं में उतरने का एलान कर दिया। शुरुआत ब्रॉडबैंड सेवाओं से होगी। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने देश के 22 सर्किलों में ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस (बीडब्ल्यूए) स्पेक्ट्रम लाइसेंस जीतनेवाली इकलौती कंपनी इनफोटेल ब्रॉडबैंड की 95 फीसदी इक्विटी खरीदकर उसे अपनी सब्सिडियरी बना लिया है।औरऔर भी

जी, हां। देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी (भारतीय जीवन बीमा निगम) का सच यही है। उसकी चुकता पूंजी महज 5 करोड़ रुपए है। लेकिन उसकी संपत्ति के एक अंश का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुंबई के सबसे पॉश इलाकों फोर्ट (कोलाबा) और चर्चगेट में हर दूसरी-तीसरी बिल्डिंग उसी की नजर आती है। पूरे देश में एलआईसी के पास जबरदस्त प्रॉपर्टी है। वह इस समय करीब 10 लाख करोड़ रुपए कीऔरऔर भी

देश में शेयर ट्रेडिंग के लिए जरूरी डीमैट खातों की संख्या अभी भले ही 1.69 करोड़ तक सीमित हो, लेकिन इनका दायरा देश के 80 फीसदी पिनकोड पतों तक फैल चुका है। यह दावा है देश की प्रमुख डिपॉजिटरी संस्था एनएसडीएल (नेशनल सिक्यूरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड) का। एनएसडीएल में डीमैट खातों की संख्या अभी 1.02 करोड़ है, जबकि दूसरी डिपॉजिटरी संस्था सीडीएसएल (सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज इंडिया लिमिटेड) में इस समय कुल 67.06 लाख डीमैट खाते हैं। इनमें बंदऔरऔर भी

केंद्रीय कैबिनेट ने कोल इंडिया और हिंदुस्तान कॉपर के विनिवेश का फैसला टाल लिया है। इसकी मुख्य वजह राजनीतिक सहमति न बन पाना बताया जा रहा है। खासकर, रेल मंत्री ममता बनर्जी कोल इंडिया के विनिवेश का विरोध कर रही हैं। गुरुवार को कैबिनेट की बैठक के बाद खान मंत्री बी के हांडिक ने मीडिया को यह जानकारी दी। लेकिन उन्होंने विनिवेश का फैसला टालने की कोई वजह अपनी तरफ से नहीं बताई। बता दें कि जहांऔरऔर भी

हमारे कपड़ा निर्यात का 60 फीसदी हिस्सा अमेरिका और यूरोप के बाजारों में होता है। इसलिए यूरोप व अमेरिका में कुछ भी गड़बड़ होती है तो देश का कपड़ा निर्यात बुरी तरह प्रभावित होता है। यूरोप के संकट के संदर्भ में केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन का कहना है कि हमारा एक पैर अब भी कब्र में है। वित्त वर्ष 2009-10 में देश का कपड़ा निर्यात 19 अरब डॉलर का रहा है। चालू वित्त वर्ष में कुलऔरऔर भी

अर्धसत्य, चक्र, अपहरण, आघात और हजार चौरासी की मां जैसी चर्चित फिल्मों के जानेमाने प्रोड्यूसर मनमोहन शेट्टी पर पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने एडलैब्स के शेयरों में इनसाइडर ट्रेडिंग के लिए एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगा दिया है। मामला अप्रैल 2006 का है जब मनमोहन शेट्टी ही एडलैब्स के मालिक व प्रबंध निदेशक निदेशक थे। इसके बाद साल 2005 में अनिल धीरूभाई अबानी समूह एडलैब्स को खरीद चुका है और अब इसका नाम रिलायंस मीडियावर्क्सऔरऔर भी