मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए हिमाचल फ्यूचरिस्टिक समूह की कंपनी इंफोटेल ब्रॉडबैंड सर्विसेज को खरीदने के बाद अब 3 जी सेवाओ में भी पैर रखनेवाली है। अंग्रेजी के प्रमुख अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए आरआईएल मुंबई और दिल्ली में सरकारी दूरसंचार कंपनी एमटीएनएल की 3 जी सेवाओं की फ्रेंचाइची लेने की कोशिश में है। गौरतलब है कि एमटीएनल दिल्ली और मुंबई में जादू नाम से अपनी 3औरऔर भी

अपनी राजनीतिक पहुंच और शेयर बाजार के निवेश में बीमा कंपनियों की बड़ी अहमियत के कारण यूलिप पर नियंत्रण में सेबी को पछाड़ने के बाद बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) बड़ी तेजी से यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) को दुरुस्त बनाने में लग गई है। सोमवार को इरडा के चेयरमैन जे हरिनारायण ने दिल्ली में एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि जल्दी यूलिप के बारे में नए दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे ताकि इसे पॉलिसीधारकों केऔरऔर भी

हड्डियों के कमजोर होने का खतरा, दांत पीले पड़कर गिरने का खतरा और ऐसे ही न जाने कितने और बीमारियों का अंदेशा। चौंकिए नहीं, हम धूम्रपान या नशीले पदार्थों की बात नहीं कर रहे। बल्कि यह मसला उस चावल का है जिसमें आर्सेनिक यानी संखिया के अंश मिले हैं। पूर्वी राज्यों के मुख्य भोजन में शामिल बोरो चावल आर्सेनिक की मौजूदगी के कारण अचानक खतरनाक हो गया है। यह जोखिम अन्य चावलों पर लागू नहीं होता है।औरऔर भी

अब 8 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में यूलिप विवाद पर सुनवाई का कोई मतलब नहीं रह गया है क्योंकि सरकार ने इससे जुड़े चार के चार कानूनों – आरबीआई एक्ट 1934, इश्योरेंस एक्ट 1938, सेबी एक्ट 1992 और सिक्यूरिटीज कांटैक्ट रेगुलेशन एक्ट 1956 में संशोधन कर दिया है। शुक्रवार 18 जून को देर रात राष्ट्रपति की तरफ से इन संशोधनों को अध्यादेश के रूप में जारी करवा दिया गया है। जब तक संसद के दोनों सदन किसीऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास इस समय 21,874 करोड़ रुपए कैश या बैंकों के एफडी, सीडी (सर्टीफिकेट ऑफ डिपॉजिट) और सरकारी प्रतिभूतियों व बांडों के रूप में हैं। इसमें से कैश व बैंक बैलेंस 13,462 करोड़ रुपए का है। कंपनी के ऊपर इस समय कुल 62,495 करोड़ रुपए का कर्ज है। उसका कुल टर्नओवर मार्च 2010 में खत्म वित्त वर्ष में 2,00,400 करोड़ रुपए रहा है जिस पर उसने 16,236 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। कंपनीऔरऔर भी

यह दास्तान है एचडीएफसी म्यूचुअल फंड को साल 2007 में 13 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच लगाए करीब 2.38 करोड़ रुपए के फटके की। इसमें चार किरदार हैं। एचडीएफसी म्यूचुअल फंड की संचालक एसेट मैनेजमेंट कंपनी के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट – इक्विटीज निलेश कापडिया, उनके सहपाठी व ट्रेडर राजीव रमणीक लाल संघवी और संघवी से जुड़े दो अन्य ट्रेडर चद्रकांत पी मेहता और दीप्ति पारस मेहता। निलेश जून 2000 से अभी तक एचडीएफसी म्यूचुअल फंड कीऔरऔर भी

देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी, जिसके शेयरधारकों की संख्या 35.62 लाख से थोड़ी ज्यादा है। ऐसी कंपनी की सालाना आमसभा को जब देश का सबसे अमीर शख्स सामने-सामने संबोधित कर रहा हो तो उद्योग जगत व निवेश की दुनिया का शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो उससे सुनना नहीं चाहेगा। वह भी तब, जब दो भाइयों के बीच पिछले पांच साल से चली आ रही जंग के खात्मे का एलान हो चुका है। जी हां, ऐसेऔरऔर भी

अगर केंद्र के सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय के दावे को सही मानें तो दो-ढाई साल भर के भीतर देश के सभी 626 जिलों में पेंशन, राशन कार्ड, दीवानी अदालतों के मुकदमे, जाति व विवाह के प्रमाण-पत्र, आय और रोजगार प्रमाण पत्र का सारा कामकाज ऑनलाइन हो जाएगा। ऐसी छह से दस सेवाएं हैं जिनका सारा लेखा-जोखा डिजिटल रूप में रखा किया जाएगा। मंत्रालय यह काम ई-डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट के तहत करवाएगा और यह प्रोजेक्ट चार-पांच महीनों में शुरू करऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने 20 प्रोफेशनल लोगों का एक पैनल बनाया है जो विभिन्न मंत्रालयों को अपना सालाना लक्ष्य पूरा करने में मदद करेगा। ये प्रोफेशनल कॉरपोरेट क्षेत्र से लिये गए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नाम हैं – गोदरेज इंडस्ट्रीज के पूर्व निदेशक विस्टी बानाजी, बोस्टन कंसल्टिंग के विक्रम भल्ला और प्राइस वॉटरहाउस कूपर्स के अमृत पांडुरंगी। खास बात यह है कि जो भी मंत्रालय इन विशेषज्ञों की सेवा लेगा, वह इन्हें हर दिन के लिए 10,000औरऔर भी

मई महीने में थोक मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति की दर भले ही 10.16 फीसदी हो गई हो। खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 5 जून को बीते हफ्ते में 16.74 फीसदी से थोड़ा घटने के बावजूद भले ही 16.12 फीसदी पर हो। लेकिन मुद्रास्फीति के इस तरह दहाई अंकों में रहने की स्थिति को रिजर्व बैंक बहुत चौंकानेवाली बात नहीं मानता है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गर्वनर के सी चक्रबर्ती ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक समारोह मेंऔरऔर भी