दो साल पहले वर्ष 2008- 09 में दुनिया को हिलाकर रख देनी वाली आर्थिक मंदी के लिए आखिर कौन जिम्मेदार था, इसका पता लगाते हुए एक अमेरिकी समिति ने कहा है कि लोगों की कारगुजारी से लेकर नियामक विफलता और नीति निर्माता सभी इस संकट के लिए जिम्मेदार रहे हैं। वित्तीय संकट जांच आयोग की 500 से अधिक पृष्ठों की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। अमेरिकी संसद ने संकट के कारणों का पता लगाने केऔरऔर भी

लोगों में व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियां लेने के बजाय सामूहिक बीमा पॉलिसियां लेने का रुझान बढ़ रहा है। यह सच झलकता है बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए ताजा आंकड़ों से। दिसंबर 2010 तक सभी 23 जीवन बीमा कंपनियों के कारोबार संबंधी आंकड़ों से पता चलता है कि दिसंबर 2009 से दिसंबर 2010 के बीच जहां सामूहिक बीमा स्कीमों में कवर किए गए लोगों की संख्या 27.93 फीसदी बढ़ गई है, वहींऔरऔर भी

कौशल या स्किल डेवलपमेंट के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के 8.7 फीसदी सालाना की दर से बढ़ने की संभावना है और वर्ष 2020 तक यहां 3.75 करोड़ रोजगार के अवसरों का भी सृजन होगा। कंसल्टेंसी फर्म एक्सेंचर ने दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम के समारोह में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत, जर्मनी, अमेरिका और ब्रिटेन जैसी चार प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का योगदान विश्व अर्थव्यवस्था में करीब 40 फीसदी के बराबरऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने उड़ीसा सरकार को आदेश दिया है कि वह ब्रिटेन स्थित वेदांता समूह द्वारा पुरी में अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय बनाने के लिए 6000 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण मामले में यथास्थिति बरकरार रखे। शुक्रवार को इस मामले में विभिन्न पक्षों की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए न्यायाधीश डी के जैन और न्यायाधीश एच एल दत्तु की पीठ ने राज्य सरकार को यह आदेश दिया। इससे पहले, शीर्ष अदालत की दो अलग-अलग पीठ ने विभिन्न पक्षों की याचिकाओंऔरऔर भी

नए वित्त वर्ष 2011-12 के बजट की तैयारियां जोरों पर हैं। वित्त मंत्रालय के दफ्तर नॉर्थ ब्लॉक में इस समय पत्रकार-परिंदे तक पर नहीं मार सकते। बजट को इतना टॉप सीक्रेट मुख्यतः एक्साइज व कस्टम ड्यूटी जैसे अप्रत्यक्ष कर प्रस्तावों की वजह से रखा जाता है क्योंकि पता लगने पर व्यापार व उद्योग जगत इनका बेजा इस्तेमाल कर सकता है। आयकर या कॉरपोरेट कर जैसे प्रत्यक्ष करों या रक्षा, शिक्षा व ग्रामीण विकास जैसी मदों का आवंटनऔरऔर भी

दवा कंपनी रेनबैक्सी लैबोरेटरीज के सीएफओ (चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर) ओमेश सेठी ने त्यागपत्र दे दिया है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को गुरुवार को यह सूचना दे दी। कंपनी ने कहा है कि, ‘‘कंपनी के प्रेसिडेंट व सीएफओ ओमेश सेठी ने 25 जनवरी 2011 से कंपनी से इस्तीफा दे दिया है।’’ हालांकि कंपनी ने उनके इस्तीफे के कारणों का उल्लेख नहीं किया है। बता दें कि पिछले साल 19 अगस्त को ही कंपनी ने ओमेश सेठी को सीएफओऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी देश में वित्तीय शिक्षा और निवेश का हुनर सिखाने के लिए व्यापक अभियान शुरू करने जा रही है। शुरुआत वह देश के पश्चिमी भाग से करेगी। इसके लिए वह निवेश व वित्तीय शिक्षा में पारंगत 40 लोगों का चयन कर चुकी है जिन्हें उसने रिसोर्स परसन (आरपी) का नाम दिया है। इनमें से कई मान्यता प्राप्त फाइनेंशियल प्लानर हैं और महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश व गोवा में रहते हैं। सेबी कीऔरऔर भी

देश में पहला बजट करीब 151 साल पहले 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था। तब दो साल पहले ही देश का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से सीधे ब्रिटिश राज के हाथ में आया था। बजट पेश करनेवाले पहले वित्त मंत्री थे अंग्रेजों के भारतीय शासन के प्रतिनिधि जेम्स विलसन। 1947-48 की अंतरिम सरकार का बजट लियाक़त अली खान ने पेश किया था। लेकिन ब्रिटिश शासन से आजाद भारत का पहला बजट आर के शणमुखम चेट्टीऔरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) इंडोनेशिया के सेन्ट्रल कालिमंतम क्षेत्र में 30 लाख टन क्षमता का संयंत्र स्थापित करने में 15,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। कंपनी से जुड़े एक सू़त्र ने बताया, ‘‘सेल ने इंडोनेशिया के सेंट्रल कालिमंतम क्षेत्र में 30 लाख टन सालाना क्षमता का संयंत्र लगाने की योजना बनाई है। इसके अलावा यहां पर कंपनी खनिज प्रसंस्करण फैक्टरी भी लगाना चाहती है।’’ उसने बताया कि इस संयंत्र की स्थापनाऔरऔर भी

खेती की लागत बढ़ने के कारण किसान समुदाय ने अगले साल से सभी अनाजों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी करने की मांग की है। कृषि मंत्री शरद पवार ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘देश में सभी इलाकों के किसान खेती की बढ़ती लागत के कारण सभी अनाजों और गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि ईंधन व मजदूरी के बढ़े हुए खर्च के कारण खेती कीऔरऔर भी