भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को देश के सभी बैंकों के शीर्ष अधिकारियों को भेजे गए सर्कुलर में बताया है कि 1 दिसंबर 2010 से चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) के तहत क्लियर होनेवाले किसी भी चेक में तारीख के अलावा कहीं भी कोई कट्टमकुट्टा नहीं चलेगा। अभी तक लोग पानेवाले के नाम से लेकर राशि तक बदलते रहे हैं। बस, जहां भी काटते थे, वहां अपना दस्तखत कर देते थे। लेकिन अब तारीख के अलावा कहीं भीऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी 1 जुलाई 2010 से ऐसा नियम लागू करने जा रही थी, जिससे म्यूचुअल फंडों में कॉरपोरेट क्षेत्र का छोटी अवधि का भारी निवेश दूर भाग सकता था। लेकिन सेबी ने एक नया सर्कुलर जारी कर इस पर अमल की तारीख 1 अगस्त 2010 कर दी है। वैसे, साथ ही कहा कि जो म्यूचुअल फंड इसकी तैयारी कर चुके हों, वे इसे पहले भी लागू कर सकते हैं। असल में सेबी ने 2औरऔर भी

अपनी राजनीतिक पहुंच और शेयर बाजार के निवेश में बीमा कंपनियों की बड़ी अहमियत के कारण यूलिप पर नियंत्रण में सेबी को पछाड़ने के बाद बीमा नियामक संस्था, आईआरडीए (इरडा) बड़ी तेजी से यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस पॉलिसी) को दुरुस्त बनाने में लग गई है। सोमवार को इरडा के चेयरमैन जे हरिनारायण ने दिल्ली में एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि जल्दी यूलिप के बारे में नए दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे ताकि इसे पॉलिसीधारकों केऔरऔर भी

अब 8 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में यूलिप विवाद पर सुनवाई का कोई मतलब नहीं रह गया है क्योंकि सरकार ने इससे जुड़े चार के चार कानूनों – आरबीआई एक्ट 1934, इश्योरेंस एक्ट 1938, सेबी एक्ट 1992 और सिक्यूरिटीज कांटैक्ट रेगुलेशन एक्ट 1956 में संशोधन कर दिया है। शुक्रवार 18 जून को देर रात राष्ट्रपति की तरफ से इन संशोधनों को अध्यादेश के रूप में जारी करवा दिया गया है। जब तक संसद के दोनों सदन किसीऔरऔर भी

मई महीने में थोक मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति की दर भले ही 10.16 फीसदी हो गई हो। खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति 5 जून को बीते हफ्ते में 16.74 फीसदी से थोड़ा घटने के बावजूद भले ही 16.12 फीसदी पर हो। लेकिन मुद्रास्फीति के इस तरह दहाई अंकों में रहने की स्थिति को रिजर्व बैंक बहुत चौंकानेवाली बात नहीं मानता है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गर्वनर के सी चक्रबर्ती ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक समारोह मेंऔरऔर भी

हिंदुस्तान यूनिलीवर ने अपने शेयर 280 रुपए के मूल्य पर वापस खरीदने या बायबैक का प्रस्ताव रखा है। कनानिधि मारन ने स्पाइसजेट की 20 फीसदी इक्विटी खरीदने का ओपन ऑफर पेश किया है। इधर न्यूनतम 25 फीसदी पब्लिक होल्डिंग के अनिवार्य नियम के बाद कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने शेयरों को स्टॉक एक्सचेंजों से डीलिस्ट कराने के बारे में सोच रही हैं। आखिर क्या है यह बायबैक, ओपन ऑफर और डीलिस्टिंग? आप इनमें कैसे शिरकत कर सकते हैं?औरऔर भी

अभी हमारे शेयर बाजारों में सात गोल्ड ईटीएफ लिस्टेड हैं। इन सभी में एक यूनिट एक ग्राम सोने के समतुल्य है। लेकिन सभी के दाम अलग-अलग हैं। यहां तक कि इनमें घट-बढ़ भी अलग-अलग होती है, जबकि सोने के दाम तो समान रूप से ही बढ़ते-घटते हैं। जैसे, 16 जून 2010 को बीएसई में बेंचमार्क गोल्ड बीज़ 0.66 फीसदी बढ़कर 1838.99 रुपए, कोटक गोल्ड ईटीएफ 0.23 फीसदी बढ़कर 1830.15 रुपए, क्वांटम गोल्ड ईटीएफ 0.23 फीसदी बढ़कर 910.05औरऔर भी

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) शेयरों की तरह म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए भी डीमैट खातों को जरूरी बनाने पर विचार कर रहा है। सेबी मे इस बारे में बीते मई माह में म्यूचुअल फंडों के साझा मंच एम्फी (एसोसिशयन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) को एक पत्र भेजकर पूछा था कि क्यों न म्यूचुअल फंड निवेश को भी डीमैट एकाउंट से जोड़ दिया जाए। एम्फी को अपने सुझाव 15 जून, मंगलवार तक सेबी केऔरऔर भी

वित्त मंत्रालय ने प्रत्यक्ष कर संहिता (डायरेक्ट टैक्स कोड, डीटीसी) का संशोधित प्रारूप जारी कर दिया है। इसमें अब ज्यादा बदलाव की गुंजाइश नहीं है। जिसको भी कोई सुझाव देना हो, वे 30 जून तक directtaxescode-rev@nic.in पर मेल कर सकते हैं। अगले महीने शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में इसे विधेयक के रूप पेश किया जाएगा और पारित होने के बाद यह करीब 50 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह ले लेगा। सभी लोगऔरऔर भी