देश में जहां एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) निवेश बढ़ता जा रहा है, वहीं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) घट रहा है। एफआईआई निवेश में एक तरह का उबाल आया हुआ है। लेकिन पिछले छह महीनों में एफडीआई घटकर लगभग आधा रह गया है। इस बीच हमारा व्यापार घाटा भी बढ़ रहा है। यूरो ज़ोन के संकट ने हमारे व्यापार संतुलन पर विपरीत असर डाला है। चिंता के ये सारे मसले खुद वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने उठाए हैं।औरऔर भी

भारतीय रेल की आमदनी का मुख्य हिस्सा मालभाड़े से आता है और अमूमन उसकी वृद्धि दर यात्री किराए से ज्यादा रहती है। लेकिन चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में यात्री किराए से रेलवे की आमदनी जहां 9.41 फीसदी बढ़ी है, वहीं मालभाड़े से हुई आमदनी 5.83 फीसदी ही बढ़ी है। रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2010-11 में अप्रैल से नवंबर तक के आठ महीनों में भारतीय रेल की कुल आमदनी में 7.18औरऔर भी

चालू वित्त वर्ष 2010-11 में अप्रैल से नवंबर तक के आठ महीनों में प्रत्‍यक्ष करों से पूरे साल के लक्ष्य का 50.38% हिस्सा जुटाया जा चुका है। बजट में कुल लक्ष्य 4,30,000 लाख करोड़ है, जबकि 2,16,628 करोड़ रुपए आ चुके हैं। यह राशि पिछले वित्‍त वर्ष की समान अवधि में मिले 1,83,822 करोड़ से 17.85% ज्यादा है। इस दौरान कॉरपोरेट टैक्स 22.30% (1,13,210 करोड़ से 1,38,461 करोड़) और निजी इनकम टैक्स 10.66% (70,278 करोड़ से 77,768औरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था इस साल पिछले तीन सालों की सबसे ज्यादा 9 फीसदी विकास दर हासिल कर सकती है, लेकिन मुद्रास्फीति की दर साल के अंत में रिजर्व बैंक के अनुमान से काफी ज्यादा रहेगी। यही नहीं, खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति तो 19.95 फीसदी पर पहुंच सकती है। वित्त मंत्रालय ने यह अनुमान अर्थव्यवस्था के छमाही विश्लेषण में पेश किया है। मंगलवार को यह विश्लेषण रिपोर्ट वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने संसद के दोनों सदनों में पेशऔरऔर भी

इस साल कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) पर मिलनेवाले 1 फीसदी अतिरिक्त ब्याज पर कोई इनकम टैक्स नहीं लिया जाएगा। श्रम व रोजगार मंत्री हरीश रावत ने सोमवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि इस आय को इनकम टैक्स से मुक्त रखा गया है। बता दें कि चालू वित्त वर्ष 2010-11 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के ट्रस्टी बोर्ड ने 8.5 फीसदी की जगह 9.5 फीसदी ब्याज देने का निर्णय लिया है। इसकेऔरऔर भी

उत्पादन बढ़ने और खरीफ फसल की आवक से सब्जियों, गेहूं व दालों के दाम में गिरावट से 20 नवंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति की दर घटकर चार माह के निचले स्तर 8.60 फीसदी पर आ गई है। इससे पिछले सप्ताह खाद्य मुद्रास्फीति 10.15 प्रतिशत पर थी। मानसून का मौसम समाप्त होने के साथ ही बाजार में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति में सुधार हुआ है। यह लगातार सातवां सप्ताह है जब खाद्य मुद्रास्फीति की दरऔरऔर भी

वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने कुछ दिन पहले कहा था कि इस साल जुलाई-सितंबर की तिमाही में देश के आर्थिक विकास दर अप्रैल-जून की तिमाही की विकास दर 8.8 फीसदी के काफी करीब रहेगी। दूसरे अर्थशास्त्री और विद्वान कल तक कह रहे थे कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में जिस तरह कमी आई है, उसे देखते हुए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में बढ़त की यह दर 8 से 8.3 फीसदी ही रहेगी। लेकिन केंद्रीयऔरऔर भी

यूरिया को डिकंट्रोल करने की मुहिम जारी है और उर्वरक कंपनियों के स्टॉक पर जुनून-सा सवार होता दिख रहा है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में बना मंत्रियों की समूह (जीओएम) शुक्रवार 3 दिसंबर को इस मुद्दे पर बैठक करेगा। पहले यह बैठक आज, सोमवार 29 नवंबर को होनी थी। लेकिन उर्वरक व रसायन मंत्री एम के अलागिरी इस बैठक से पहले उर्वरक उद्योग के प्रतिनिधियों से मिलना चाहते थे। यह मुलाकात 1 दिसंबर को होगी,औरऔर भी

सब्जी व दालों का बाजार नरम होने से से 13 नवंबर को समाप्त सप्ताह के दौरान खाद्य वस्तुओं पर आधारित मुद्रास्फीति की दर थोड़ा और घट कर 10.15 फीसदी पर आ गई। इससे पिछले सप्ताह में खाद्य महंगाई दर 10.3 फीसदी थी। बता दें कि छह सप्ताह से खाद्य मुद्रास्फीति में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मानसून के बाद सब्जी और दालों की आपूर्ति सुधरने से खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव कम हुआ है। सप्ताह केऔरऔर भी

भारत जितना निर्यात करता है, उससे कहीं ज्यादा आयात करता है। केवल माल के व्यापार की बात करें तो विश्व व्यापार संगठन के आंकड़ों के अनुसार 2009 में हमारा व्यापार घाटा (आयात व निर्यात का अंतर) 87 अरब डॉलर था। दुनिया में केवल ब्रिटेन (129 अरब डॉलर) और अमेरिका (549 अरब डॉलर) हम से ऊपर थे। माल व सेवा को मिला दें तो शुद्ध आयात में हम केवल अमेरिका से पीछे हैं। अमेरिका का आंकड़ा 699 अरबऔरऔर भी