भाषा की बाधा
यह सच है कि अंग्रेजी भाषा ने हम भारतीयों को दुनिया से लेने के काबिल बना रखा है। लेकिन आगे बढ़ने के लिए अंग्रेजी सीखने का दबाव न होता तो शायद हम लेने के बजाय दुनिया को दे रहे होते।और भीऔर भी
सूरज निकलने के साथ नए विचार का एक कंकड़ ताकि हम वैचारिक जड़ता तोड़कर हर दिन नया कुछ सोच सकें और खुद जीवन में सफलता के नए सूत्र निकाल सकें…
यह सच है कि अंग्रेजी भाषा ने हम भारतीयों को दुनिया से लेने के काबिल बना रखा है। लेकिन आगे बढ़ने के लिए अंग्रेजी सीखने का दबाव न होता तो शायद हम लेने के बजाय दुनिया को दे रहे होते।और भीऔर भी
आठ घंटे सोना, आठ घंटे काम करना और आठ घंटे मौज-मस्ती। दिन के चौबीस घंटे का यह आदर्श विभाजन है। ऐसा संतुलन बन जाता तो मजा आ जाता। लेकिन आदर्श भी कभी सच होते हैं भला!और भीऔर भी
देश में असली विकास व सच्चे लोकतंत्र की स्थितियां तब बनेंगी जब जीवन में आपकी कामयाबी इससे नहीं तय होगी कि आप किसे जानते हैं, बल्कि इससे तय होगी कि आप क्या जानते हैं।और भीऔर भी
सब कुछ चलायमान हो तो रुक कर योजना बनाने की फुरसत कैसे मिल सकती है! रुके नहीं कि आप पीछे छूट गए। समय के साथ चलना है तो चलते-चलते योजना बनाने का हुनर सीखना पड़ेगा।और भीऔर भी
कुछ खेल ऐसे होते हैं जिनमें आपकी जीत पूरे देश व समाज की जीत होती है। तो, टुच्चे खेल काहे खेलें! हमें तो ऐसे काम में खुद को लगाना चाहिए जिसमें हमारे जीतने पर करोड़ों चेहरे खिल जाएं।और भीऔर भी
निरंतर नए ऑरबिट में जाने की कोशिश करना इंसान का मूल स्वभाव है। इसलिए हम रूटीन से ऊब जाते हैं। लेकिन नए ऑरबिट में जाकर भी नए चक्र में बंधना पड़ता है। चक्र के इस चक्कर से मुक्ति नहीं।और भीऔर भी
चलो! आंखें बंदकर अनंत यात्रा पर निकल जाएं। अंदर की प्रकृति को बाहर की प्रकृति से एकाकार हो जाने दें। पेड़ों की फुनगियों, पहाड़ों के छोर को छूते हुए बादलों के फाहों पर उड़ने दें। मृत्यु का अभ्यास करने दें।और भीऔर भी
स्त्री होने के नाते ही पत्नी का भाव-संसार पति से भिन्न हो जाता है। हमें इस भिन्नता को अंगीकार करना पड़ेगा। उसका चेहरा हमारे चेहरे में समा नहीं सकता, साथ जुड़कर नया चेहरा बनाता है।और भीऔर भी
निराशा आपको ठहरकर हर नकारात्मक पहलू पर गौर करने का मौका देती है। इसका एक चक्र है। मंजिल के हर पड़ाव पर यह आपको जकड़ देती है ताकि आप और ज्यादा ताकत व विश्वास से आगे बढ़ सकें।और भीऔर भी
जो लोग सिर्फ अपने बारे में सोचते हैं, वे नौकरी करते हैं। जो लोग सिर्फ समाज के बारे में सोचते हैं, वे होलटाइमरी करते हैं। जो लोग अपने साथ-साथ समाज के बारे में भी सोचते हैं, वे उद्यमी बनते हैं।और भीऔर भी
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