संघर्ष की तोड़
लौकिक को अलौकिक बता दो। कर्मफल को विधि का विधान बता दो। मूर्तिभंजक की मूर्तियां बना दो। सुधारक को आराध्य बना दो। इंसान को भगवान बना दो। संघर्ष की धार कुंद करने के ये पक्के सूत्र हैं।और भीऔर भी
झूठ का धंधा
कोई मूर्खता में झूठ बोले तो चलता है। लेकिन जो लोग जानबूझ कर झूठ बोलते हैं, कितना बड़ा कलेजा होता होगा उनके पास! पर क्या करें? कुछ लोगों का धंधा और पापी पेट झूठ बोलकर ही चलता है।और भीऔर भी
गान, मान, शान
मेहनत करते समय गान और मेहनत करने के बाद मान मिल जाए तो काम करने का उत्साह चौगुना हो जाता है। फिर तो इंसान शान से श्रम का रस लेता रहता है और उसे इसका फल भी मिलता है।और भीऔर भी
सच्चा देशभक्त
राजद्रोह का मतलब राष्ट्रद्रोह नहीं होता। हालांकि हर सरकार यही बताने की कोशिश करती है। लेकिन राष्ट्र किसी भी राज से बहुत-बहुत ऊपर होता है। जो इस बात को समझता है, वही सच्चा देशभक्त है।और भीऔर भी
न जाने किस रूप में…
सभी अपने-अपने काम में लगे हैं। आप भी, मै भी। आप मेरी सुनें, जरूरी नहीं। मैं आपकी मानूं, जरूरी है। लेकिन न जाने किस रूप में नारायण मिल जाएं। इसलिए किसी की भी उपेक्षा करना ठीक नहीं।और भीऔर भी
अजगर या ड्रैगन
विचार यूं तो अजगर की तरह अलहदी होते हैं। उन्हें करवट बदलने में ठीकठाक वक्त लगता है। स्थितियां बदलने पर भी पुराने खांचे में बंधे रहते हैं। लेकिन बदलते हैं तो ड्रैगन की तरह हाहाकारी हो जाते हैं।और भीऔर भी
हर इंच पर कब्जा
जमीन की हर इंच पर कोई न कोई काबिज है। मांगने पर महाभारत तय है। यूं तो व्योम भी हमारा है। पर, उसकी नींव के लिए भी जमीन चाहिए। इसलिए जीवन में संघर्ष के सिवा कोई रास्ता नहीं है पार्थ!और भीऔर भी
सावधानी हटी, जेब कटी
यह थोड़े सच और ज्यादा झूठ का जमाना है। हर कोई लूट-खसोट के जरिए पूंजी बटोरने में जुटा है। मौका मिलते ही शिकार पर हाथ साफ। इसलिए सावधान! ठग और जेबकतरे किसी भी भेष में आ सकते हैं।और भीऔर भी
जीना ज़रा हटकर
जब आप सिर्फ जिए चले जाते हो तो आप मन व शरीर के गुलाम होते हो। जब आप सोचकर जीते हो तब आप मन व शरीर के सारथी होते हो। जब आप लीक से हटकर जीते हो तो आप दृष्टा बन जाते हो।और भीऔर भी
