मां के गर्भ में खास वक्त तक पता नहीं चलता कि हम पुरुष बनेंगे या स्त्री। उसी तरह किसी संगठन में अल्प विकसित अवस्था तक हमारा खेमा तय नहीं होता। पर हैसियत बनते ही हम पक्षधर बन जाते हैं।और भीऔर भी

किसी की हारी-बीमारी या शारीरिक विकलांगता हम नहीं दूर कर सकते। लेकिन समाज की व्यवस्था को इतना न्यायसंगत जरूर बना सकते हैं कि हर किसी को उसका वाजिब हक मिले और लूटखसोट बंद हो।और भीऔर भी

भगवान के भ्रमजाल में फंसानेवाला शख्स सच्चा गुरु नहीं हो सकता क्योंकि भगवान तो अपनी कमियों-कमजोरियों को पूरा करने के लिए खुद हमारे द्वारा समय व स्थान से हिसाब से गढ़ी गई छवि है।और भीऔर भी

जीने के दो ही तरीके हैं। एक, दिए हुए हालात को जस का तस स्वीकार कर उसी में अपनी कोई जगह बना ली जाए। दो, हालात से ऊपर उठकर नई संभावनाओं को तजबीज कर उन्हें मूर्त रूप दे दिया जाए।और भीऔर भी

हमारा तारणहार, हमारा मुक्तिदाता कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे अंदर बैठा है। वह प्रकृति का वो जटिल समीकरण है, उसके तत्वों का वो विन्यास है जो हमसे पूछे बिना हमें चलाता-नचाता रहता है।और भीऔर भी

दलित के नाम पर आप क्यों सत्ता पाना चाहती हैं बहनजी? जनता के नाम पर आप सरकार में क्यों आना चाहते हैं नेताजी? जनता पर यूं मुफ्त कृपा बरसाने के पीछे की असली नीयत तो खोलिए जनाब!और भीऔर भी

हमें अपने इर्दगिर्द हमेशा ऐसे लोगों की जरूरत होती है जो हमारी आंखों में आंखें डालकर सच बोल सकें। खासकर तब, जब हमारे दिन खराब चल रहे हों और हम बार-बार अपने लक्ष्य से चूक रहे हों।और भीऔर भी

ज्ञान आनंद की पहली कड़ी है। ज्ञान की आंधी के बिना भ्रम नहीं टूटता, माया का जाल नहीं छंटता। जाल नहीं छंटता तो कुंडलिनी नहीं जगती, सहस्रार कमल नहीं खिलता, हम आनंद विभोर नहीं होते।और भीऔर भी

ऐसी चिंता का क्या फायदा जो किसी समाधान तक आपको न पहुंचा सके? जो आपको भंवरजाल में फंसाकर अनागत के भय के दलदल में डाल दे, वैसी चिंता को ठोकर मारकर आगे निकल जाना चाहिए।और भीऔर भी

एक हम ही तुर्रमखां नहीं हैं यह काम करनेवाले। दूसरे भी बहुत-से हैं जो इसी वक्त यह काम बड़ी शिद्दत से कर रहे होंगे। यह सोच एक तो हमारा गुमान तोड़ती है। दूसरे अकेलेपन की घबराहट भी मिटा देती है।और भीऔर भी