किसी समय हमारे किसान देसी खाद का ही इस्तेमाल करते थे। लेकिन रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते और पशुपालन के घटते चलन ने इसे खत्म कर दिया। इस समय देश में कुल कृषियोग्‍य भूमि के 3% से कम भाग में जैव-उर्वरकों का उपयोग होता है। वह भी पहले से बढ़ने के बाद। जैव-उर्वरकों का कुल उत्‍पादन वित्‍त वर्ष 2008-09, 2009-10 और 2010-11 में क्रमशः 25,065 टन, 20,040 टन और 37,998 टन रहा है। सरकार इधर राष्ट्रीय कृषि विकासऔरऔर भी

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास अपने और किराये के गोदामों को मिलाकर अनाज भंडारण की कुल क्षमता 333 लाख टन है। इसमें से 1 अक्टूबर 2011 तक 74% क्षमता का उपयोग हुआ है। राज्‍यों की एजेंसियों की कुल भंडारण क्षमता अभी 295 लाख टन है। इस प्रकार देश में भंडारण क्षमता 628 लाख टन है, जबकि हमारे पास अभी खाद्यान्न का भंडार 517 लाख टन ही है। साथ ही सरकार ने अधिक खरीद को संभालने केऔरऔर भी

केंद्रीय सर्तकता आयोग (सीवीसी) का नया टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1964 एक महीने में चालू हो जाएगा। इस पर सातों दिन, चौबीसों घंटे घूसखोर अफसरों की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यह कॉलसेंटर जैसा होगा। लेकिन दिल्ली सरकार या उसके विभागों के खिलाफ यह हेल्पलाइन मददगार नहीं होगी क्योंकि वे सीवीसी के दायरे में नहीं आते। 1964 में गठित सीवीसी के अभी दो टोल-फ्री नंबर हैं 1800-11-1080 और 011-2465100। लेकिन इन पर सोम से शुक्र सुबह 9औरऔर भी

यूरोप में संकट में फंसी सरकारों के ऋण का बड़ा हिस्सा ऐसे लोगों या संस्थाओं ने दे रखा है, जो विदेशी हैं और उस देश में नहीं रहते। विदेशियों द्वारा दिए गए कर्ज का हिस्सा इटली सरकार के कुल ऋण में 44.4%, ग्रीस के ऋण में 57.4% व पुर्तगाल सरकार के ऋण में 60.5% है। इसमें यूरोपीय सेंट्रल बैंक का दिया ऋण शामिल नहीं हैं। यहां तक कि फ्रांस की सरकार के ऋण का भी 62.5% हिस्साऔरऔर भी

इस समय पेट्रोल के मूल्य का 38.2% हिस्सा केंद्र व राज्य सरकारों के टैक्स का है। जैसे, दिल्ली में पेट्रोल का दाम 68.64 रुपए है जिसमें से 26.22 रुपए सरकारी टैक्सों के हैं। अभी अंतरराष्ट्रीय दाम के हिसाब से कंपनियों की तरफ से तय पेट्रोल का आधार मूल्य 41.38 रुपए है। इस पर 3% शिक्षा अधिभार को मिलाकर केंद्र को प्रति लीटर 14.78 रुपए की एक्साइज ड्यूटी मिलती है, जबकि दिल्ली सरकार को वैट के रूप मेंऔरऔर भी

केंद्र सरकार के कामकाज में ई-भुगतान प्रणाली पूरी तरह अपना लिये जाने के बाद करीब दो करोड़ चेकों की जरूरत खत्म हो जाएगी। इससे केंद्रीय मंत्रालयों, प्रतिरक्षा और रेलवे विभाग द्वारा किया जा रहा 6 लाख करोड़ रुपए का भुगतान ऑनलाइन हो जाएगा। अभी रिजर्व बैंक ने इलेक्‍ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस (ईसीएस), नेशनल इलेक्‍ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) और रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) जैसी इलेक्‍ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियां चला रखी हैं। सरकार नकद-रहित लेन-देन का लक्ष्य हासिल करना चाहतीऔरऔर भी

भारतीय शेयर बाजार का पूंजीकरण दुनिया के शेयर बाजार का करीब 3% है। हमारे सबसे बड़े बैंक एसबीआई का लाभ चीन के सबसे बड़े बैंक का महज 10% है। निजी क्षेत्र में हमारी तेल व गैस की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज इसी क्षेत्र की फ्रांसीसी कंपनी टोटल के एक तिहाई आकार की है। ऊपर से हमारी 100 सबसे बड़ी कंपनियों के लाभ में 41% हिस्सा सरकारी कंपनियों, 41% हिस्सा परिवार नियंत्रित कंपनियों और बाकी 18% हिस्साऔरऔर भी

तमिलनाडु के दक्षिणी हिस्से में चेन्नई से करीब 500 किलोमीटर दूर है शिवकाशी, जहां बनते हैं देश के कोने-कोने तक पहुंचनेवाले 90 फीसदी पटाखे। शिवकाशी का पटाखा उद्योग करीब 2500 करोड़ रुपए का है और इसमें लगभग 1.5 लाख लोग काम करते हैं। देश की 70 फीसदी माचिसें भी वहीं बनती हैं। यही नहीं, देश की ऑफसेट प्रिंटिंग का 70 फीसदी काम वहीं होता है। शिवकाशी पहले बाल मजदूरों के लिए बदनाम था। लेकिन बताते हैं किऔरऔर भी

अमेरिका में पिछले तीन सालों में प्रति व्यक्ति खर्च-योग्य आय 1315 डॉलर घट गई है। इतनी तेज गिरावट पिछले पांच दशकों में, जब से वहां आंकड़े जुटाए जा रहे हैं, तब से कभी नहीं आई थी। 2008 में वहां टैक्स अदायगी के बाद बचनेवाली यह रकम प्रति व्यक्ति 33,794 डॉलर थी। लेकिन चालू साल 2011 की दूसरी तिमाही तक यह 3.89 फीसदी घटकर 32,479 डॉलर रह गई है, जबकि सामान्य गति से बढ़ने पर इसे 34,000 डॉलरऔरऔर भी

मारुति सुजुकी में जून से लेकर अब तक करीब 60 दिन तक चली हड़ताल से हरियाणा सरकार को 350 करोड़ रुपए की एक्साइज ड्यूटी और 35 करोड़ के सेल्स टैक्स का नुकसान हो चुका है। खुद मारुति को करीब 1540 करोड़ रुपए की चपत लगी है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि मारुति प्रबंधन कमर्चारियों की जिस यूनियन को मान्यता देता है, उसमें पिछले 11 सालों से गुप्त मतदान के जरिए कोई चुनाव नहीं हुए हैं।औरऔर भी