रिजर्व बैंक अभी तक हर तीन महीने पर मौद्रिक नीति की समीक्षा पेश करता रहा है। लेकिन अब वह हर डेढ़ महीने/छह हफ्ते पर ऐसा करेगा। हां, बैंकरों के साथ बैठक और प्रेस कांफ्रेंस पहले की तरह साल भर में अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी में चार बार ही होगी। 2005 तक रिजर्व बैंक साल में केवल दो बार अप्रैल व अक्टूबर में मौद्रिक नीति पेश करता था। अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व भी हर छहऔरऔर भी

देश के अधिकांश निवेशक भले ही गुजरात, महाराष्ट्र व राजस्थान में हों, लेकिन सरकार की 400 करोड़ रुपए की निवेशक शिक्षा एवं सुरक्षा निधि (आईईपीएफ) में पंजीकृत 100 एनजीओ में से सबसे ज्यादा 19-19 एनजीओ तमिलनाडु व उत्तर प्रदेश के हैं। उ.प्र. में कानपुर में वीरेंद्र जैन द्वारा संचालित मिदास टच इन्वेस्टर्स एसोसिएशन ही काम का है। बाकी कुछ छंटे हुए नाम। अवध समाज सेवा संस्थान (अंबेडकरनगर), आदर्श सेवा संस्थान (बाराबंकी), चित्रकूट सेवा आश्रम (चित्रकूट), कृष्ण जनकल्याणऔरऔर भी

चीन में दुनिया का सबसे बड़ा टेलीफोन नेटवर्क है। यहां कुल फोनधारकों की संख्या 110 करोड़ के पार चली गई है। इनमें से 80 करोड़ मोबाइल फोनधारक हैं, जबकि बाकी 30 करोड़ फिक्स्ड लाइन टेलिफोन हैं। चीन में 3जी सेवाओं का दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है। वहां इस साल जून के अंत तक 3जी मोबाइल फोनधारकों की संख्या 40% बढ़कर 2.52 करोड़ हो गई है। इस साल चीन 3जी सेवाओं पर 12,000 करोड़ युआन (17.73औरऔर भी

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई), एलआईसी और म्यूचुअल फंड हमारे बाजार के बड़े खिलाड़ी हैं। रिलायंस समूह का ऑपरेटिंग तंत्र धीरूभाई के जमाने से ही सक्रिय है। लेकिन सात अन्य बड़े ऑपरेटर हैं जिनके हाथ बड़े लंबे हैं, जिन पर सेबी हाथ नहीं रख पाती। ये हैं – आरजे (राकेश झुनझुनवाला), केपी (केतन पारेख उर्फ पिंक पैंथर उर्फ वन मैन आर्मी), आरके/जीएस (राधाकृष्ण दामाणी उर्फ ओल्ड फॉक्स), आरडी (रमेश दामाणी),  एके (अजय कयान), एमएम (मनीष मारवाह) और एडीऔरऔर भी

म्यूचुअल फंड के हर प्रचार के साथ लिखा या बोला जाता है कि म्यूचुअल फंड बाजार के जोखिम से प्रभावित होते हैं। कृपया निवेश करने से पहले ऑफर दस्तावेज को सावधानी से पढ़ लें। लेकिन अगर आप ऑफर दस्तावेज को पूरी सावधानी पढ़ें तो उसमें बाजार के जोखिम के बारे में एक लाइन भी नहीं रहती। खाली स्कीम का बखान ही बखान होता है। यह कहना है दो दशकों से भी ज्यादा वक्त से पूंजी बाजार केऔरऔर भी

औसत भारतीय अब भी कर्ज लेने से परहेज करता है। हम अपनी कुल सालाना खरीद का बमुश्किल एक फीसदी हिस्सा क्रेडिट कार्ड से पूरा करते हैं, जबकि दुनिया का औसत 12 फीसदी का है। दूसरी तरफ बैंकों की पहुंच ग्रामीण आबादी तक नहीं बन पाई है। गावों में उधार लेनेवाले 90 फीसदी से ज्यादा लोग स्थानीय सूदखोरों का सहारा लेते हैं। बैंक भी गांवों को उपेक्षित करते हैं। साल 2009 तक के आंकड़ों के अनुसार बैंकों नेऔरऔर भी

देश में आर्थिक विकास के साथ आर्थिक अपराध भी बढ़ते जा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा शिकार बैंकिंग क्षेत्र हुआ है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मुताबिक 2004-05 में बैंक फ्रॉड के कुल 10,450 मामले दर्ज किए गए थे। चार साल बाद 2008-09 तक इनकी संख्या लगभग 129 फीसदी बढ़कर 23,917 हो गई। 2004-05 में इससे बैंकिंग क्षेत्र को 779 करोड़ की चपत लगी थी, जबकि 2008-09 तक यह नुकसान 142 फीसदी बढ़कर 1883 करोड़ रुपए परऔरऔर भी

साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के मूल में होने के बावूजद अमेरिका के बैंक दुनिया के सबसे बड़े बैंकों में जगह बनाए हुए हैं। बैंकर पत्रिका की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक टियर-1 पूंजी के मामले में दुनिया के दस बड़े बैंकों में अमेरिका के चार बैंक शामिल हैं।  इनमें टॉप पर है बैंक ऑफ अमेरिका, जिसने वित्तीय संकट के दौरान मेरिल लिंच को खरीदा था। इससे पहले नंबर-1 पर रहनेवाला अमेरिकी बैंक जेपी मॉरगन चेज अबऔरऔर भी

साल 2009 के अंत तक देश में सक्रिय गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की संख्या 33 लाख थी। कुल आबादी 120 करोड़ मानें तो हर 365 भारतीय पर एक एनजीओ। इसमें केवल पंजीकृत एनजीओ शामिल हैं। सीधा-सा मतलब है कि देश में अवाम से जुड़ने का एक बड़ा तंत्र सरकार के समानांतर बन चुका है। सबसे ज्यादा 4.8 लाख एनजीओ महाराष्ट्र में हैं। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 4.6 लाख, उत्तर प्रदेश में 4.3 लाख, केरल में 3.3 लाख,औरऔर भी