मानो तो निवेशक हैं, ट्रेडर हैं अन्यथा
यकीन नहीं आता। लेकिन कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की तरफ से निवेशकों को पूंजी बाज़ार में पारंगत बनाने के लिए जारी 156 पेज की नई किताब के पेज नंबर 84 पर बताया गया है कि, ‘भारतीय बाज़ार में केवल रिटेल निवेशकों को ही डे-ट्रेड की इजाज़त है।’ डे ट्रेडिंग का मतलब शेयरों की उस खरीद-फरोख्त से है, जिन्हें दिन के दिन में निपटा लिया जाता है। बाज़ार बंद होने से पहले ही सारी पोजिशंस काट ली जाती हैं।औरऔर भी
डीमैट खाते हुए दो करोड़ से ज्यादा
28 फरवरी 2013 तक देश में कुल डीमैट खातों की संख्या 2,09,19,851 हो गई है। इनमें से 1,26,32,085 खाते एनएसडीएल के पास हैं और 82,87,766 खाते सीडीएसएल के पास। माना जाता है कि 2.09 करोड़ डीमैट खातों में से अधिकतम नौ लाख खाते एचएनआई, एफआईआई, डीआईआई व ब्रोकरों जैसे बड़े निवेशकों के हो सकते हैं। बाकी दो करोड़ खाते रिटेल निवेशकों के हैं। 1992 में हर्षद मेहता कांड के फूटने से पहले देश में रिटेल निवेशकों कीऔरऔर भी
यहां बाधा तो वहां 42 फीसदी रिटर्न!
निफ्टी हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन 1.41 फीसदी बढ़कर 5940 का स्तर तोड़ चुका है। इसलिए अगर कुछ अघट नहीं हुआ तो अब उसे 6000 का लक्ष्य भेदने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। हालांकि इसे 5970 पर तगड़ी बाधा का सामना करना पड़ा। फिलहाल माहौल में आशावाद है। रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने भी तस्दीक कर दी है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराते बादल छंट चुके हैं और अगले साल हमारी आर्थिक विकास दर 7 फीसदी से ऊपरऔरऔर भी
यह पार तो निफ्टी फिर छह हज़ार
तीर ठीक निशाने पर। गुरुवार को निफ्टी बड़े आराम से 5850 का स्तर पार कर गया। वजह है इस साल भी अच्छे मानसून की अच्छी संभावना और विदेशी बाज़ारों में फ्यूचर्स की शुरुआती बढ़त। एस एंड पी 500 और डाउ जोन्स दोनों ही बढ़कर बंद हुए हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने अपने यहां कल 630.47 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद की, जबकि म्यूचुअल फंडों व बीमा कंपनियों समेत घरेलू संस्थाओं की शुद्ध बिक्री 715.11 करोड़ रुपएऔरऔर भी
आईटी एक्ट में 2500 से ज्यादा संशोधन!
वित्त मंत्री ने वित्त विधेयक 2013 के जरिए आयकर कानून 1961 में 49 नए प्रावधान जोड़े हैं। सरकार अमूमन हर साल आयकर कानून में ऐसे पचास संशोधन करती है। कभी-कभी तो यह संख्या सौ तक पहुंच जाती है। पचास का औसत मानें तो 1961 में बने इस कानून में अब तक के 52 सालों में ढाई हज़ार से ज्यादा संशोधन हो चुके होंगे। मुंबई की जानीमानी लॉ फर्म डीएम हरीश एंड कंपनी के पार्टनर अनिल हरीश कहतेऔरऔर भी
ठीक से भिड़ा नहीं हमारा-आपका टांका
मुझे इस बात का कोई अफसोस नहीं कि मैंने यह मंज़िल क्यों चुनी। मलाल है तो बस इतना कि मंजिल तक पहुंचने का रास्ता अभी तक धुंधला है। ज्ञान पर पड़े भाषा के परदे को तार-तार नहीं, तो कम से कम हल्का क्यों नहीं कर सका। जी हां! जिस देश में कुछ लोग ज्यादातर लोगों के नादान होने पर मौज कर रहे हैं, वहां भाषा बहुत बड़े परदे का काम करती है। लोग जानकार हो गए तोऔरऔर भी




