आगे क्या होगा, कोई नहीं जानता। अनिश्चितता पक्की है। इंसान अपने पूरे इतिहास में इसे ही मिटाने की कोशिश करता रहा है। ट्रेडिंग भी अनिश्चितता में संभावनाओं को पकड़ने की कोशिश है। कभी-कभी बड़े संकेतक भी धोखा दे जाते हैं। इसका मतलब कि सतह के नीचे कोई बड़ी चीज चल रही है। ऐसी सूरत में ट्रेडर को रुककर खटाक से पलट जाना चाहिए। बाज़ार से जिद करने का मतलब पिटना है। अब आज की अनिश्चितता में छलांग…औरऔर भी

नया शिकारी जंगल में हर हिलती-डुलती चीज़ पर गोली चला देता है, अपनी परछाई पर भी। वहीं कुशल शिकारी भलीभांति जानता है कि कौन-सा शिकार करना है। वो गिनती की गोलियां ही रखता है। उलझन नहीं, सरलता। अराजकता नहीं, अनुशासन। सफल ट्रेडर दस जगह हाथ-पैर नहीं मारता। चुने हुए इंडीकेटर व चुनिंदा स्टॉक्स। वो 50 के चक्कर में पड़ने के बजाय 5 स्टॉक्स में ही गहरी पैठ बनाता है। आगे है जून की पहली ट्रेडिंग के तिकड़म…औरऔर भी

मल्टीबैगर के चक्कर में बहुतेरे निवेश सलाहकार जमकर लोगों को उल्लू बनाते हैं। धन कई गुना करने की लालच में सीधे-साधे लोग तगड़ी फीस देकर निवेश कर देते हैं। उन्हें नहीं बताया जाता कि स्मॉलकैप या मिडकैप स्टॉक्स ही कई गुना बढ़ सकते हैं, जिनके गिरने का खतरा भी इतना ही भयंकर होता है। दूसरी तरफ लार्जकैप कंपनियों में निवेश के डूबने का खतरा नहीं, रिटर्न भी ठीकठाक मिलता है। पेश है ऐसी ही एक लार्जकैप कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग या निवेश के लिए डीमैट एकाउंट का होना ज़रूरी है और अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक इस समय देश में कुल लगभग 2.11 करोड़ डीमैट एकाउंट हैं। इसका एक फीसदी भी पकड़ें तो हर दिन करीब दो लाख लोग ट्रेडिंग या निवेश करते होंगे। लेकिन इनमें से बमुश्किल दो हज़ार ही होंगे जो बाकायदा सोच-समझ कर धन लगाते या निकालते हैं। बाकी ज्यादातर लोग यहां अनाड़ियों की तरह मुंह उठाए चले जाते हैं। वैसेऔरऔर भी

शराब, ड्रग्स या ट्रेडिंग की लत लग जाए तो बरबाद होने में वक्त नहीं लगता। खुशी की तलाश में निकले लोग अक्सर खुद को ही गंवा बैठते हैं। दरअसल, ट्रेडिंग का बुनियादी सूत्र है कि जिस भाव पर डिमांड सप्लाई से ज्यादा होती है, वहां से भाव चढ़ते हैं। इसकी उल्टी सूरत में गिरते हैं। हमें इन स्तरों का पता लगाकर खरीदना/बेचना होता है। इसलिए यहां एडिक्ट नहीं, एकदम मुक्त दिमाग चाहिए। अब हफ्ते की आखिरी ट्रेडिंग…औरऔर भी