जबरदस्त शोर है। अखबारों में, नेट पर, चैनलों पर, समूचे मीडिया में। राजनीति में, समाज में। यहां तक कि मन में। इस शोर के बीच सच को पकड़ना है। जैसे, भारत-यूरोप व्यापार वार्ता में यूरोप चाहता है कि भारत वाइन व कारों का आयात सस्ता कर दे। भारत चाहता है कि यूरोप भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए रास्ता सुगम कर दे। हम भोग में डूबें और अपनी प्रतिभाएं उन्हें दे दें! ये कैसा व्यापार!! देखते हैं आज काऔरऔर भी

कामयाबी के लिए हर क्षेत्र के कुछ नियम-धर्म हैं। शेयर बाज़ार का नियम यह है कि यहां जितना भी धन लगाना हो, उसका 50-60% लार्ज, 25-30% मिड और 5-10% स्मॉल कैप कंपनियों में लगाना चाहिए। स्मॉल व मिड कैप कंपनियों के शेयर बढ़ते बड़ी तेज़ी से हैं तो लालच उनकी तरफ धकेलता है। लेकिन उनके गिरने का खतरा भी ज्यादा है तो सुरक्षित निवेश का नियम निकाला गया। इस बार एक लार्ज कैप कंपनी में निवेश कीऔरऔर भी

हम अक्सर प्रचलित मान्यताओं और प्रचार के शिकार हो जाते हैं। सच है कि जनधन का हर लुटेरा गलत है, चाहे वो राजनीतिक हो या चोर-डकैत। इस लूटे गए धन पर वह टैक्स देगा तो फंस जाएगा। ऐसी काली कमाई से निकला काला धन गलत है। लेकिन मान लीजिए कि हम फालतू झंझट से बचने से लिए अपनी मेहनत की कमाई पर टैक्स नहीं देते तो वह काला धन कैसे हो गया? कोई इलाका सरकार से बगावतऔरऔर भी

हम हिंदुस्तानी फालतू माथा फोड़ते हैं कि ग्रह-नक्षत्रों की चाल हमारे जीवन को कैसे चलाती है। लेकिन इस पर कम दिमाग लगाते हैं कि खुद हम इंसानों का सामूहिक बर्ताव क्या और कैसे गुल खिलाता है। शेयर बाजार में खरीदने व बेचनेवालों के सामूहिक मन को कैप्चर करता है परिष्कृत सॉफ्टवेयरों की मदद से टेक्निकल एनालिसिस। पर वो बस दशा बताता है, दिशा नहीं देता। दिशा जानने के सूत्र भिन्न हैं। बताएंगे बाद में। अभी हाल बाज़ारऔरऔर भी

हाल ही में टीआईएफआर के एक प्रोफेसर से मुलाकात हुई जो केवल निफ्टी फ्यूचर्स में ट्रेड करते हैं। मैंने उनसे पूछा कि निफ्टी फ्यूचर्स के भाव स्पॉट से अलग क्यों होते हैं? उन्होंने बता दिया। मेरा अगला सवाल कि कायदन सेटलमेंट के दिन स्पॉट में निफ्टी का बंद भाव फ्यूचर्स के भाव के बराबर होना चाहिए। पर ऐसा होता नहीं। क्यों? उनके पास जवाब नहीं था। मैं भी पता कर रहा हूं। अब आज के बाज़ार कीऔरऔर भी