पौधे ही किसी दिन पेड़ बनते हैं। पर शेयर बाज़ार को यह बात समझ में ही नहीं आती। बड़ी कंपनियों की दशा-दिशा दिखाने वाला बीएसई सेंसेक्स इस साल जनवरी से लेकर अब तक 7.65% बढ़ा है, पर मध्यम कंपनियों से जुड़ा बीएसई मिड कैप सूचकांक 9.66% और छोटी कंपनियों से जुड़ा बीएसई स्मॉल कैप सूचकांक 15.58% गिरा है। सो, मिड और स्मॉल कैप में अभी बढ़ने की काफी गुंजाइश है। तथास्तु में आज एक स्मॉल कैप कंपनी…औरऔर भी

उधर डॉलर का जनक अमेरिकी क्रेद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व घोषणा करता है कि वो जनवरी से सिस्टम में 85 अरब के बजाय 75 अरब डॉलर के ही नोट डालेगा, इधर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयरों की खरीद घटाने के बजाय बढ़ा देते हैं। बुधवार की घोषणा के अगले दिन गुरुवार को एफआईआई ने हमारे कैश सेगमेंट में 2264.11 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद की। कल शुक्रवार को भी उन्होंने शुद्ध रूप से 990.19 करोड़ रुपए केऔरऔर भी

पैसा और पानी हमेशा निकलकर नीचे भागते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा फैल सकें। अमेरिका नोट छाप रहा है, पैसे की लागत/ब्याज दर दबाकर कम रखी है तो वह निकल-निकलकर बाहर भाग रहा है। अब उसने जनवरी से हर महीने 85 अरब डॉलर के बजाय 75 अरब डॉलर के ही नोट छापने का फैसला कर लिया तो अमेरिकी बाज़ार खुश हैं, बाकी मायूस। कल डाउ जोन्स ने नया शिखर बनाया तो सेंसेक्स आया नीचे। क्या होगा आज…औरऔर भी

आप बुरा होना पक्का माने बैठे हों, तब ऐनवक्त पर वैसा न होना आपको बल्लियों उछाल देता है। कल ऐसा ही हुआ। थोक और रिटेल मुद्रास्फीति के ज्यादा बढ़ जाने से सभी मान चुके थे कि रिजर्व बैंक ब्याज दर बढ़ा ही देगा। लेकिन उसने मौद्रिक नीति को जस का तस रहने दिया। ग्यारह बजे इसका पता लगने के तीन मिनट के भीतर निफ्टी सीधा एक फीसदी उछलकर 6225.20 पर जा पहुंचा। पकड़ते हैं आज की गति…औरऔर भी

रामचरित मानस की यह चौपाई याद कीजिए कि मुनि वशिष्ठ से पंडित ज्ञानी सोधि के लगन धरी, सीताहरण मरण दशरथ को, वन में विपति परी। जीवन और बाज़ार की यही खूबसूरती है कि वह बड़े-बड़े विद्वानों की भी नहीं सुनता। जहां लाखों देशी-विदेशी निवेशकों का धन-मन लगा हो, भाव हर मिनट पर बदलते हों, वहां बाज़ार को मुठ्ठी में करने का दंभ भला कैसे टिकेगा! इसलिए फायदे के साथ रखें घाटे का हिसाब। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी