स्मॉल कैप स्टॉक्स में निवेश इसीलिए करते हैं कि उनमें कई गुना बढ़ने की संभावना होती है। लेकिन जब सभी स्मॉल कैप कंपनियों की तरफ टूट पड़े हों तो उनके भाव ज्यादा ही चढ़ जाते हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बीएसई सेंसेक्स फिलहाल 17.88 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि उसका स्मॉल कैप सूचकांक 116.05 के पी/ई पर। आखिर, इतनी महंगी चीज़ के पीछे क्यों भागें! तो, आज तथास्तु में एक लार्जकैप स्टॉक…औरऔर भी

बाज़ार भले ही 25 अप्रैल से बिकवाली का शिकार हो। लेकिन निफ्टी जिस तरह 4 फरवरी से 23 अप्रैल के बीच 14% बढ़ा, उसका श्रेय ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ को दिया जा रहा है। यह कौआ कान ले गया, सुनकर कौए के पीछे दौड़ पड़नेवाली बात है क्योंकि इसी दरमियान तुर्की का बाज़ार 20%, ब्राज़ील का 16%, इंडोनेशिया का 19% और मलयेशिया का 18% बढ़ा है। इसलिए अंश ही नहीं, समग्र को देखिए। अब शुक्रवार का बौद्ध-ट्रेड…औरऔर भी

बाज़ार सबके लिए एक है। स्टॉक्स की लिस्ट और उनसे बने सूचकांक सबके लिए एक हैं। लेकिन हर दिन वहां से कुछ लोग रोते हुए निकलते हैं तो कुछ खिलखिलाते हुए। जाहिर है कि हर ट्रेडर की गति उसकी व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर है, न कि बाज़ार की वस्तुगत स्थिति पर क्योंकि उठना-गिरना तो बाज़ार का शाश्वत स्वभाव है। इसलिए कुछ जानकार लोग कहते हैं कि ट्रेडिंग खुद को खोजने जैसा काम है। अब खोज गुरुवार की…औरऔर भी

आप चाहें तो सर्वे करके देख सकते हैं कि जो लोग ट्रेडिंग में टिप्स के पीछे भागते हैं, वे मरीचिका के चक्कर में भागते हिरण की तरह ताज़िंदगी प्यासे रह जाते हैं। लंबे निवेश में यकीनन रिसर्च आधारित सलाह काम करती है। लेकिन ट्रेडिंग में घुसने, निकलने, घाटा खाने और पूंजी बचाने व बढ़ाने का सिस्टम बनाकर अनुशासन का पालन न किया, लालच व डर को हावी होने दिया तो कमाई मुमकिन नहीं। अब बुधवार की ट्रेडिंग…औरऔर भी