इस सन्निपात में चले ज़रा संभलकर
बाज़ार में सन्निपात-सा छा गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति भले ही अच्छी न हो। लेकिन मात्र चालू खाता घाटा (सीएडी) घटने के आंकड़े ने बाज़ार को उठाने का बहाना दे दिया। मोदी के आने का हल्ला मचाकर गुब्बारे को फुलाया जा रहा है। लेकिन शेयर बाज़ार की हर हरकत के पीछे मंशा मुनाफा कमाने की होती है। बाज़ी हमेशा बड़े ट्रेडरों के हाथ में होती है। हम फंसे नहीं, इस सावधानी के साथ बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी
मजबूत कंपनियां संकोची भी होती हैं
समाज के आगे बढ़ने के साथ ज्ञान से लेकर समृद्धि तक का लोकतंत्रीकरण होता गया। यह किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि ज़रूरत के चलते हुआ। हालांकि अब भी विशेषाधिकार बचे हुए हैं। लेकिन अधिकारों और समृद्धि का विस्तार आज की जरूरत बन गया है। जो कंपनियां बढ़ना चाहती हैं, वे रिस्क पूंजी के लिए अवाम के बीच आती हैं। आम लोगो को भी इस निवेश का फायदा मिलता है। आज तथास्तु में पेश है एक संकोची कंपनी…औरऔर भी
जानते हैं वही कमाते हैं, बाकी पिटते हैं
शेयर बाज़ार में कामयाब लोगों की एक-एक हरकत सोची-समझी, जानी-बूझी होती है। यहां अनायास कुछ नहीं होता। हां, पूरी सृष्टि में अनिश्चितता है तो यहां भी कोई उसे मिटा नहीं सकता। लेकिन उसे साधने की पुरजोर कोशिश जरूर होती है। यहां दो तरह के लोग होते हैं। एक वे, जो जानते हैं कि क्या कर रहे हैं। दूसरे वे, जो सिर उठाकर रातोंरात अमीर बनने चले आते हैं। पहले बराबर कमाते हैं, जबकि दूसरे बराबर पिटते हैं।औरऔर भी
मन का धन तो कतई नहीं है ट्रेडिंग
हम अक्सर जानकर नहीं, मानकर चलते हैं। जो जैसा है, उसे उस रूप नहीं, बल्कि जिस रूप में हम देखना चाहते हैं, वैसा देखते हैं। लग जाए, ऐसा होगा तो मान बैठते हैं कि वैसा ही होगा। ट्रेडिंग कोई आत्मपरक नहीं, बड़ी वस्तुपरक गतिविधि है। मन की पूर्वधारणा हमें सच नहीं देखने देती। नतीज़तन लड़ने से पहले ही हम हार जाते हैं। मनैव मनुष्यानाम् कारण बंधन मोक्षयो। गीता की यह सूक्ति ध्यान में रखकर बढ़ते हैं आगे…औरऔर भी
सावधान रहें ऐसे प्रेम भरे संदेशों से
क्यूपिड का मतलब है प्रेम का देवता, कामदेव। इसी के नाम पर 1985 में बनी क्यूपिड ट्रेड्स एंड फाइनेंस। मुंबई के पंचरत्न ओपरा हाउस में दफ्तर है। केतनभाई सोराठिया इसके कर्ताधर्ता हैं। कल सुबह एसएमएस आया कि क्यूपिड ट्रेड्स को 145 पर खरीदें, महीने भर में 460 तक जाएगा। अरे भाई, कैसे? सालों से कंपनी का धंधा तो निल बटे सन्नाटा है! सावधान रहें ऐसे प्रेम-पत्रों से। झांसे में कतई न आएं। अब देखें गुरुवार का बाज़ार…औरऔर भी





