शेयर बाज़ार में आग-सी लगी है। सेंसेक्स और निफ्टी थोड़ा दम मारने के बाद नया ऐतिहासिक शिखर बना डालते हैं। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) इस साल 1 जनवरी से कल 5 मई तक भारतीय शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट में 35,559 करोड़ रुपए (करीब 590 करोड़ डॉलर) की शुद्ध खरीद कर चुके हैं। ऐसा तब है जब जनवरी से ही अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने बांडों की खरीद घटा दी है। ऐसे में है सावधानी की दरकार…औरऔर भी

तूफान में दो तरह के लोग बाहर निकलते हैं। एक, राहतकर्मी और दूसरे ऐसे दुस्साहसी लोग जो तूफान से भी मौजमस्ती खींच लाने में पारंगत होते हैं। अगले सोमवार, 12 मई को लोकसभा चुनावों का अंतिम चरण पूरा हो जाएगा। उसी हफ्ते शुक्रवार, 16 मई को नई सरकार का फैसला होगा। ऐसे में बेहद दुस्साहसी या उस्ताद ट्रेडर ही शुक्रवार 9 मई के बाद अपनी पोजिशन खुली रखेंगे। निकालने के लिए कैश, आगाज़ करें नए हफ्ते का…औरऔर भी

महंगाई साल-दर-साल बढ़ती है। देशी घी तीन साल पहले 250 रुपए/किलो था, अभी 400 रुपए/किलो हो चुका है। फिर कंपनी के शेयरों में महंगाई क्यों नहीं आती? आती है, बल्कि सच कहें तो अच्छी कंपनियां ही महंगाई को मात दे पाती हैं। इसीलिए महंगाई को बेअसर करने के लिए उनमें धन लगाया जाता है। तीन साल पहले यहां सुझाया सुप्रीम इंडस्ट्रीज़ का शेयर 155 से 460 हो चुका है। आज तथास्तु में एक मिडकैप कंपनी…और भीऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग खुद गाड़ी ड्राइव करने जैसा है, जबकि लंबा निवेश ट्रेन से लंबी दूरी के सफर जैसा है। ड्राइविंग के तौर-तरीके आप सीख सकते हैं। लेकिन ट्रैफिक के बीच अगल-बगल की गाड़ियों से दूरी का सेंस, कहां से कट मारकर कहां निकलना है, यह हरेक के अपने अंदाज़, फितरत और अभ्यास पर निर्भर करता है। वहीं, ट्रेन में टिकट लिया और निश्चिंत होकर सो गए। मंज़िल आने पर उतर लिए। अब शुक्र की ट्रेडिंग…औरऔर भी