बाजार एक नई ऐतिहासिक ऊंचाई पर। घबराइए मत, यह वाक्य अगले दिनों बार-बार सुनने को मिलेगा। अभी तो सेंसेक्स 26,900.30 और निफ्टी 8035 तक उठा है। किसी भी वस्तु की तरह शेयरों के भाव भी तभी बढ़ते हैं जब डिमांड सप्लाई से ज्यादा होती है। फर्क इतना है कि यहां डिमांड उपयोगिता से नहीं, उम्मीदों से बनती है। और, उम्मीदें बनाते हैं एनालिस्ट जिनमें से बहुतेरे ब्रोकरों के पे-रोल पर होते हैं। अब देखें मंगलवार की नब्ज़…औरऔर भी

जिसने भी गीता का निष्काम भाव का दर्शन आत्मसात किया होगा, वह शेयर/कमोडिटी या फॉरेक्स बाज़ार का सफलतम ट्रेडर बन सकता है। बड़े-बड़े दिग्गज बार-बार कहते हैं कि जिसका ध्यान कमाने के उल्लास या गंवाने के ग़म से ज्यादा ट्रेडिंग की कला सीखने पर रहता है, वही एक दिन सफल ट्रेडर बनता है। साथ ही उनकी सीख है कि हमें कमाई से ज्यादा ध्यान अपनी पूंजी बचाने पर देना चाहिए। अब शुरू करें नए हफ्ते का अभ्यास…औरऔर भी

जिस तरह एफडी करने का कोई नियत साल नहीं होता, सोना या ज़मीन खरीदने का कोई बंधा-बंधाया समय नहीं होता, वैसे ही शेयर बाज़ार में निवेश करने का पक्का समय नहीं होता। अतिरिक्त धन हुआ तो लगा दिया और ज़रूरत पड़ी तो निकाल लिया। दूसरे माध्यमों की तरह यह भी निवेश का एक माध्यम है। फर्क बस इतना है कि मुद्रास्फीति को मात देने की समयसिद्ध क्षमता अच्छी कंपनियों में ही होती है। अब आज का तथास्तु…औरऔर भी

हर इंसान को प्रेम व दोस्ती जैसी चंद चीजों के अलावा बाकी तमाम जरूरतें पूरा करने के लिए धन चाहिए। समाज के विकास के साथ धन हासिल करने के तरीके बदलते रहते हैं। फॉरेक्स, कमोडिटी व स्टॉक ट्रेडिंग आज के ज़माने का तरीका है जो पहले नहीं था। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जापान की गृहणियां फॉरेक्स ट्रेडिंग करती हैं और वहां रिटेल फॉरेक्स बाज़ार में महिलाओं का योगदान करीब 25% है। अब परखें गुरु का गुर…औरऔर भी