अल्गोरिदम या हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेड (एचएफटी) का नाम सुनकर हम खुद को बड़ा पस्त महसूस करते हैं। ऐसे ट्रेड अमूमन इंट्रा-डे होते हैं और इसमें चंद पैसों की चाल पर लाखों कमाए जाते हैं। सारा काम कंप्यूटर में पहले से दर्ज सॉफ्टवेयर करता है। पलक समझते ही सौदा पूरा। स्पीड और पूंजी में हम उनकी बराबरी नहीं कर सकते। लेकिन अपने नियमबद्ध या अल्गोरिदम स्विंग ट्रेड में हम उन्हें मात कर सकते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

प्रकृति ही नहीं, बाज़ार में भी कमज़ोर चीज़ नहीं चलती। बिना तैयारी के यहां जो कोई आता है, जानकार लोगों का शिकार बन जाता है। यहां कोई इंट्यूशन या घमंड नहीं चलता क्योंकि जब चीजें पल-पल बदल रही हों तब घमंड आपको एक जगह चिपका देता है। और, ज़िंदगी की ट्रेड-मिल पर आपका पैर कहीं चिपका तो समझो कि आप गए। नई गति को पकड़ने का माद्दा हो, तभी ट्रेडिंग करनी चाहिए। अब आजमाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयरों के भाव कभी-भी सीधी रेखा में नहीं चलते। मिनट-घंटे, दिन-हफ्ते, महीना-साल, हर छोटे-बड़े टाइमफ्रेम में बराबर ऊपर-नीचे होते रहते हैं। ट्रेन्ड बदलता है। कुशल ट्रेडर की कला यह है कि वह स्टॉक में ठीक तब एंट्री मारे, जब कोई ट्रेन्ड शुरू हो रहा हो और जैसे ही ट्रेन्ड बदलनेवाला हो, उससे थोड़ा पहले निकल ले। ट्रेन्ड की यही समझ सफलता की कुंजी है। कहने में आसान, लेकिन करने में कठिन। अब देखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी

महीने भर पहले हमने एक कंपनी में 225-234 की रेंज में निवेश को कहा था, लक्ष्य तीन साल में 450 तक पहुंचने का है। इस दौरान इसका शेयर 206 तक गिर गया तो कुछ सब्सक्राइबर चिंतित हो उठे। वैसे, 6 फरवरी को बेहतर नतीजों के बाद यह उठने लगा है। दरअसल, भारतीय अर्थव्यवस्था और अच्छी कंपनियों में इतनी संभावना है कि हमें महीने या तिमाही की गिरावट से परेशान नहीं होना चाहिए। तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी