भारत की आर्थिक गाथा बहोत लंबी है
महीने भर पहले हमने एक कंपनी में 225-234 की रेंज में निवेश को कहा था, लक्ष्य तीन साल में 450 तक पहुंचने का है। इस दौरान इसका शेयर 206 तक गिर गया तो कुछ सब्सक्राइबर चिंतित हो उठे। वैसे, 6 फरवरी को बेहतर नतीजों के बाद यह उठने लगा है। दरअसल, भारतीय अर्थव्यवस्था और अच्छी कंपनियों में इतनी संभावना है कि हमें महीने या तिमाही की गिरावट से परेशान नहीं होना चाहिए। तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
स्टॉप-लॉस का रिश्ता है ट्रेडिंग पूंजी से
पोजिशन साइज़िंग कर ली। हर सौदे में बराबर पूंजी लगाई। फिर भी बाज़ार का रिस्क आपको डुबा सकता है। बचने के लिए आपने हर सौदे में 2% स्टॉप-लॉस भी लगा डाला। लेकिन बाज़ार में तेज़ उतार-चढ़ाव है तो इतना स्टॉप-लॉस तो खटाक से ट्रिगर हो जाएगा! इससे बचने का उपाय यह है कि किसी एक सौदे में स्टॉप-लॉस की मात्रा आपकी कुल ट्रेडिंग पूंजी के 0.5% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
समान दांव से भी रिस्क मिटता नहीं
ज़रूरी नहीं कि जब भी बाज़ार खुला हो, हर दिन ट्रेडिंग की जाए। कमाने की खातिर महीने में चार-पांच सौदे भी पर्याप्त होते हैं। फिर भी मान लीजिए: आप महीने में 20 सौदे करते हैं और आपकी ट्रेडिंग पूंजी 50,000 रुपए है तो 50,000 को 20 से भाग देने पर रकम निकलती है 2500 रुपए। आपको किसी सौदे में इससे ज्यादा रकम नहीं लगानी चाहिए। लेकिन रिस्क इतने से न्यूनतम नहीं होता। पकड़ें अब गुरुवार का गुरुमंत्र…औरऔर भी
सफेद हंस ठीक, चौंकाता है काला हंस
दिल्ली के चुनाव नतीजों ने जैसा चौंकाया है, उसे ‘ब्लैक स्वान’ पल कहा जाता है। इसे लेबनान के ट्रेडर और लेखक नासिब निकोलस ताबेल ने इसी नाम की किताब में साफ किया है। प्रायः ऐसा कुछ हो जाता है जिसकी हमने दूर-दूर तक कल्पना नहीं की होती। ट्रेडिंग करते वक्त इस अनिश्चितता को हमेशा याद रखना चाहिए। इसी की मार से बचने के लिए पोजिशन साइज़िंग जैसे उपाय किए जाते हैं। अब चलाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी






