पांच साल पहले जब मैंने ‘मल्टी-बैगर’ शब्द सुना तो न कुछ समझ में आया, न ही किसी ने समझाया। बाद में पता चला कि इसका सीधा-सा मतलब है कई गुना बढ़नेवाले शेयर। प्रायः ये स्मॉल-कैप कंपनियों के शेयर होते हैं। दिक्कत यह है कि ऐसे शेयर हफ्तों में आसमान छू लेते हैं, लेकिन दिनों में ही पाताल तक लुढ़क जाते हैं। इसलिए इनके चुनने में बड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है। आज तथास्तु में एक संभावनामय स्मॉल-कैप कंपनी…औरऔर भी

टेक्निकल एनालिसिस के तमाम इंडीकेटर अपने-आप में अधूरे हैं क्योंकि वे अब तक जो हो चुका है, उसी से निकला संकेत देते हैं। इसीलिए उन्हें लैंगिग इंडीकेटर कहा जाता है। लेकिन ठीक पिछली कैंडलस्टिक की बनावट और भावों के स्तर के साथ उन्हें मिला दें तो भविष्य के प्रबल संकेतक बन जाते हैं। कल हमारे सुझाए इमामी लिमिटेड में यही कमाल दिखा, जब उसने एक ही दिन में हफ्ते का लक्ष्य पा लिया। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में रोज़-ब-रोज़ के भाव खबरों से प्रभावित होते हैं। लेकिन अगर हम दिन बढ़ाते जाएं तो तात्कालिक खबरों का असर कम हो जाता है। इसी रिस्क को कम करने के लिए हम स्विंग, मोमेंटम या पोजिशन ट्रेड का सहारा लेते हैं। बहुत से प्रोफेशनल ट्रेडर तो जिस दिन खबर रहती है, ट्रेड ही नहीं करते। कुछ तो साल में 20-25 दिन ही ट्रेड करके अपना निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लेते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

बाज़ार बंद होने के बाद आंकड़े आए कि अप्रैल में रिटेल मुद्रास्फीति चार महीनों के न्यूनतम स्तर 4.7% पर आ गई। लेकिन मार्च में देश का औद्योगिक उत्पादन बढ़ने की रफ्तार सुस्त पड़कर 2.1% हो गई। कल के बारे में कहा जा रहा है कि चूंकि भूमि अधिग्रहण और जीएसटी जैसे विधेयक फिलहाल टल गए हैं, इसलिए बाज़ार इतना ज्यादा गिर गया। फिर, बाहर से ग्रीस का संकट भी मंडरा रहा है। अब चलाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

खरीदारी ज्यादा तो बाज़ार बढ़ता है और बिकवाली ज्यादा तो बाज़ार गिरता है। खरीदारी, बिकवाली का ज्यादा होना बाज़ार में सक्रिय निवेशकों या ट्रेडरों, खासकर संस्थाओं के भावी आकलन व रुख से तय होता है। बाज़ार लगातार दूसरे दिन बढ़ गया तो दूर की कौड़ी फेंकी जाने लगी कि चूंकि चीन ने ब्याज दर घटा दी है, इसलिए रिजर्व बैंक 2 जून को अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दर घटा सकता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी