बराबर तनाव से दूर रहे। भावनाओं पर अंकुश रखा। किसी के कहने में नहीं आए। खुद सारी गणना की, हिसाब-किताब लगाया। फिर भी सौदा जैसा सोचा था, उसकी उल्टी दिशा में चला गया। ऐसा होने पर अपनी किस्मत को दोष मत दीजिए क्योंकि हर किसी के साथ यही सब होता है। बाज़ार या भविष्य कभी किसी के इशारों पर नहीं चलता। इसीलिए यहां रिस्क को संभालने की रणनीति अपनाई जाती है। अब देखते हैं सोम का व्योम…औरऔर भी

बराबर रिटर्न कमाते-कमाते अक्सर भ्रम हो जाता है कि शेयर बाज़ार में रिस्क ही नहीं। अगर है तो हम उस्ताद जो ठहरे! इस भ्रम को तोड़ दिया बीते हफ्ते बुधवार ने, जब सेंसेक्स 2.63% और निफ्टी 2.74% लुढ़क गया, वो भी सिंगापुर में हुई अल्गोरिदम ट्रेडिंग के चलते। याद रखें कि ग्लोबल हो जाने से शेयर बाज़ार में निवेश/ट्रेडिंग का रिस्क घटने के बजाय बढ़ गया है। आज तथास्तु में ऐसी कंपनी जिसमें रिस्क थोड़ा ज्यादा है…औरऔर भी

भावनाएं किसी को भी दीवाना बना देती हैं। लेकिन दीवानगी किस्से-कहानियों में चलती है, दुनियादारी में नहीं। खासकर, वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में तो कतई नहीं। यहां सफलता का सूत्र है कि ट्रेड में भावनाओं को कभी भी एंट्री न लेने दें। अन्यथा वह आपका सारा बना-बनाया खेल बिगाड़ देगी। यहां जो भी भावनाओं में बहते हैं, वे शिकार बनते हैं और उनका शिकार वे करते हैं जो भावनाओं को साधते हैं। अब करें शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार पांच माह की तलहटी पर। सेंसेक्स 2.63% तो निफ्टी 2.74% लुढ़क गया। आखिर क्यों? मोदी सरकार से उम्मीद का टूटना और विदेशी निवेशकों पर टैक्स की बात तो अब पुरानी पड़ गई है। कल असल में गिरने का ट्रिगर लगा सिंगापुर में एल्गोरिदम ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से निफ्टी फ्यूचर्स की बिकवाली से। 9.39 बजे एनएसई में भी 900 करोड़ रुपए से ज्यादा के निफ्टी फ्यूचर्स बेच डाले गए। फिर तो गिरना रुका ही नहीं। अब आगे क्या…औरऔर भी