हर कोई भविष्य जानने को बेचैन। खासकर शेयर बाज़ार में। वही उस्ताद जो एलानिया बोले कि बाज़ार कहां से कहां जाएगा। लोगबाग जेब जलाकर सीखते हैं कि वो धंधेबाज़ तो पूरा फेंकू था। याद रखें, सटीक भविष्यवाणी नामुमकिन है। वॉरेन बफेट तक की गणनाएं धोखा खा जाती हैं। इसलिए हम-आप या कोई भी हमेशा सही नहीं हो सकता। जो इसे समझता है वो ऊंच-नीच के हिसाब से चलता है। बाकी डूब जाते हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

कोई भी साधन अपने आप में साध्य नहीं होता। इसी तरह टेक्निकल एनालिसिस खुद में कोई अमोघ अस्त्र नहीं है। उसका काम बाज़ार में चल रहे भावों के पीछे की भावना को समझना है। वह बाज़ार के पीछे चलती है, आगे नहीं। ऐसे में जब एसोसिएशन ऑफ टेक्निकल मार्केट एनालिस्ट के अध्यक्ष सुशील केडिया कहते हैं कि निफ्टी 7700 और रुपया प्रति डॉलर 57 तक जाएगा तो उनका बड़बोड़ापन ही इसमें झलकता है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

दुनिया के बांड बाज़ार में बड़ी उथल-पुथल मची है। रिटेल ट्रेडर बांड बाज़ार पर ध्यान नहीं देते। लेकिन अपने यहां बांड बाज़ार के कम विकसित होने के बावजूद देशी ही नहीं, विदेशी संस्थाएं तक इसमें जमकर खेलती हैं। हालांकि अपने शेयर बाज़ार में भी यही संस्थाएं असली रुख तय करती हैं। अच्छी खबर यह है कि विदेशी संस्थाएं इधर ठंडी पड़ रही हैं तो बड़ी भारतीय संस्था एलआईसी ने मोर्चा संभाल लिया है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

अब तक जिन भी ट्रेडरों से मिला हूं, ज्यादातर बराबर हैरान-परेशान दिखते हैं। फोन से लेकर सोशल मीडिया तक बोलते-बतियाते रहते हैं कि निफ्टी कहां जाएगा या कोई स्टॉक कहां तक मार करेगा। लगता है जैसे हरेक पल उन्हें किसी थ्रिल की ज़रूरत है। बिना डायरेक्टर के ‘एक्शन’ बोले हमेशा एक्शन में लगे रहते हैं। यह एक तरह की बीमारी है। हमें ट्रेडिंग में कामयाब होना है तो इस बीमारी से बचना होगा। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार हमेशा चक्रों में चलते हैं। तभी उसमें धन का प्रवाह बराबर बना रहता है। खबरें इस प्रवाह को चलाते रहने का बहाना हैं। फिर, अब तो दुनिया इतनी बड़ी हो गई है, ग्लोबल हो चुकी है कि अच्छी-बुरी खबरों का कोई टोटा नहीं रहता। उतार-चढ़ाव का चक्र न रहे तो ट्रेडिंग का धंधा ही बैठ जाएगा, बाज़ार में लिक्विडिटी या तरलता सूख जाएगी। यह बुनियादी सच समझना ज़रूरी है। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी