तनाव में बुद्धि गई तो सफल कैसे हों!
बाज़ार में बहुत कुछ ऐसा है जो हमारे वश में नहीं। यहां लोगों का चकरघिन्नी बन जाना सहज है। बाज़ार की चाल के आगे सभी अक्सर खुद को बड़ा असहाय महसूस करते हैं, बशर्ते प्रवर्तकों से जुड़े इनसाइडर ट्रेडर या किसी देशी-विदेशी निवेशक संस्था का हिस्सा न हों। इसलिए स्वतंत्र व व्यक्तिगत ट्रेडर बड़े तनाव में रहते हैं। तनाव में बुद्धि नहीं काम करती तो सफल नहीं होते। क्या है बचने का रास्ता? फिलहाल बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
यहां हवाबाज़ी नहीं, सच ही चलता है
दुनिया के बाज़ार आपस में जुड़ चुके हैं तो पैमाने भी अब ग्लोबल हो गए हैं। अगर मोदी सरकार के एक साल की बात करें तो इस दौरान सेंसेक्स 11.84% और निफ्टी 13.74% बढ़ा है। लेकिन डॉलर के लिहाज से इस बीच एमएससीआई इंडिया सूचकांक मात्र 5.7% बढ़ा है, जबकि चीन का बाज़ार 35.56%, जापान 17.73% व अमेरिका 12.58% बढ़ा है। विदेशी निवेशकों के निकलने की एक वजह यह भी हो सकती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
अल्गो में कंप्यूटर नहीं, चले दिमाग
अल्गोरिदम ट्रेडिंग को लेकर बड़ा डर और हौवा है। लेकिन असल में यह चंद नियमों पर अमल का माध्यम भर है। यह अमल कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर करे या हमारा दिमाग, बात एक है। इसमें बस करते यह हैं कि कुछ नियमों – जैसे, मूविंग एवरेज, ट्रेडिंग वोल्यूम का पैटर्न, खरीदने-बेचने के भाव का अंतर व आरएसआई वगैरह पर अमल करते हैं ताकि फैसले में भावनाओं नहीं, बुद्धि का दखल न हो। अब परखते हैं सोमवार का व्योम…औरऔर भी
एक ही बार सारी खरीद ज़रूरी नहीं
उद्योग में संभावना हो, कंपनी मजबूत हो, प्रबंधन अच्छा हो तो उसके शेयर हम कई बार थोड़ा-थोड़ा खरीद सकते हैं। पिछले एक-दो महीने में इसी कॉलम में बताई गई कुछ कंपनियों के शेयर गिरे हैं तो घबराने के बजाय उन्हें थोड़ा और खरीद लेना चाहिए। वहीं, जो कंपनी अपने अंतर्निहित मूल्य से ज्यादा भाव पर ट्रेड हो रही हो, उसके थोड़े शेयर अभी खरीदने चाहिए और बाकी बाद में। आज तथास्तु में ऐसी ही एक चढ़ी कंपनी…औरऔर भी






