हर तरह की कंपनियों के शेयरों में ट्रेड करनेवाले लोग अलग-अलग होते हैं। जो अल्गोरिदम ट्रेडिंग करते हैं, वे निफ्टी या सेंसेक्स से बाहर की कंपनियों को हाथ नहीं लगाते। मिड कैप या स्मॉल कैप स्टॉक्स में अलग तरह के ट्रेडर काम करते हैं। फार्मा, इंफ्रा या रीयल एस्टेट में अलग किस्म के पेशेवर ट्रेडरों की दिलचस्पी होती है। इसीलिए इन स्टॉक्स की चाल अलग होती है। यह सच हमें समझना ज़रूरी है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

हमें मुख्य रूप से एनएसई में लिस्टेड लगभग 1600 कंपनियां पर ही ध्यान देना चाहिए क्योंकि उनमें सक्रियता ज्यादा होती है और वे अमूमन बीएसई में भी लिस्टेड होती हैं। आप गौर करें तो पाएंगे कि सूचकांकों की चाल, उसमें शामिल कंपनियों की चाल और सूचकांकों से बाहर की कंपनियों की चाल एक जैसी हो, यह ज़रूरी नहीं। ऐसे में हमें ठोंक-बजाकर ट्रेडिंग के लिए 20 से 25 कंपनियां चुन लेनी चाहिए। अब देखें गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

दुनिया के सामने अपनी आर्थिक चुनौतियां हैं तो भारत की अर्थव्यवस्था के सामने अलग चुनौतियां हैं। सरकार इनसे कैसे निपटती है, इसी पर बाज़ार की अगली चाल निर्भर है। जिस इंफ्रास्ट्रक्चर को चढ़ाने की बात हो रही थी, उसके विकास से जुड़ी प्रमुख सरकारी कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स के शेयर एक-दो नहीं, दस साल की तलहटी पर आ चुके हैं। अभी इसके 30% और गिरने की बात की जा रही है। अब आजमाते हैं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार को लेकर हम अमूमन केवल दो ही दिशाओं के बारे में सोचते हैं। ऊपर जाएगा कि नीचे? नहीं सोचते कि अगर पिछले दो सालों की तरह समय बीतने के साथ कहीं न गया तो? अभी जो सूरतेहाल है, उसमें जब तक लिस्टेड कंपनियों का मुनाफा ठहरा है, तब तक सूचकांक, कंपनियों के शेयर भाव अटके रहेंगे क्योंकि जोश में जमकर चढ़ा पी/ई अनुपात फिलहाल एकदम ज़मीन पर आ चुका है। अब पकड़ते है मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

करीब दो साल पहले मोदी सरकार बनने से तीन दिन पहले सेंसेक्स 23,871.23 पर बंद हुआ था। अभी बीते शुक्रवार को 23,709.15 पर बंद हुआ है। ऊपर उठा बाज़ार अब सम हो चुका है। अभी कितना नीचे जाएगा, कहा नहीं जा सकता। बहुत मुमकिन है कि यूं ही सीमित दायरे में ऊपर-नीचे होता रहे। असल में बाज़ार की सटीक चाल क्या होगी, इसे जानना असंभव है। ऐसे में क्या हो ट्रेडिंग की रणनीति? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी