हार्मोन तक से लड़ना पड़ता ट्रेडिंग में
न्यूनतम रिस्क में अधिकतम फायदे की रणनीति कहने में जितनी आसान है, करने में उतनी ही कठिन। इसमें पहली लड़ाई हमें खुद से ही लड़नी पड़ती है। सालों-साल से जो धारणाएं मन में बैठा रखी हैं, उन्हें तोड़ना पड़ता है। यहां तक कि शरीर में सहजता से सक्रिय हो जानेवाले हार्मोन तक से जूझ़ना पड़ता है। एड्रेनलीन हार्मोन हमारे भीतर करो-मरो का भाव जगाता है। लेकिन इससे बचने से ही ट्रेडिंग सधती है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
ट्रेडिंग की रणनीति क्या रखी है आपने
कोई भी युद्ध अट्ठे-कट्ठे नहीं जीता जाता। इसके लिए सुविचारित रणनीति ज़रूरी होती है। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग भी आज के ज़माने का बड़ा सघन युद्ध है। अगर आपके पास ट्रेडिंग की कोई रणनीति नहीं है तो बेहतर होगा कि आप खुद को लंबे समय के निवेश तक सीमित रखें। लेकिन निवेश व ट्रेडिंग के पीछे समान सोच रखें कि हमें न्यूनतम रिस्क में अधिकतम फायदा कमाना है। कैसे होगा यह हासिल? अब देखें सोम का व्योम…औरऔर भी
निवेश करना चाहिए रदा दर रदा
इतिहास गवाह है कि रोम एक दिन में नहीं बनता। न ही हमारे गांवों में पुराने ज़माने के मिट्टी के घर एक झोंक में बन जाया करते हैं। मिट्टी का एक रदा रखो। उसे सूखने दो। फिर अगला रदा रखो। अच्छे निवेश के लिए भी ऐसा ही धैर्य चाहिए। अच्छी से अच्छी कंपनी में भी एकमुश्त निवेश नहीं जमता। थोड़ा अभी, बाकी भावों की लहर माफिक स्तर तक गिरने पर। अब तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी
चार्ट ही नहीं, जानें आर्थिक हालात भी
वित्तीय बाज़ार सिर्फ खरीद-बिक्री के संतुलन से नहीं, बल्कि मूल आर्थिक स्थिति से भी संचालित होता है। पिछले पांच-छह सालों में क्रूड ऑयल का हाल इसका प्रमाण हैं। जो लोग खाली चार्ट के भरोसे उसकी फ्यूचर ट्रेडिंग कर रहे थे, असली बाज़ार ने उनको कहीं का नहीं छोड़ा। कंपनियों के शेयरों के भाव भी अंततः उनके बिजनेस की मूल स्थिति से प्रभावित होते हैं। इसलिए ट्रेडिंग के लिए फंडामेंटल भी जानना जरूरी है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी






