ये तथाकथित विश्लेषक कैसे काम करते हैं, इसका एक उदाहरण पेश है। एक बड़ी फर्म के एक्सपर्ट ने जमना ऑटो जब 191 पर था, तब ज्ञान दिया कि वो कुछ दिन में 212 तक चला जाएगा। उनसे पूछा जाना चाहिए था कि जो शेयर पहले से 52 हफ्ते के शिखर पर है, उसमें ज्यादा उम्मीद इस बात की है कि पुराने निवेशक बेचकर मुनाफा कमाएंगे तो आखिर किनकी खरीद से वो 11% बढ़ेगा? अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

ये सारे धंधेबाज़ बड़ा सेफ खेलते हैं। रिटेल ट्रेडरों की भोली मानसिकता का फायदा उठाते हैं। आम लोग रिस्क लेने से बचते हैं, पहले से बढ़े शेयर को खरीदने में सुरक्षा समझते हैं। तमाम विश्लेषक उनके इस डर व लालच का फायदा उठाते हैं। टेक्निकल एनालिसिस के फंडे निकालकर बताते हैं कि बढ़ा हुआ शेयर अभी और ऊपर क्यों जाएगा। अंततः रिस्क से बचने में लगे आम ट्रेडर तगड़ा रिस्क खा जाते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

मीडिया से लेकर ब्रोकर हाउसों की तरफ से जो ट्रेडिंग की जो सिफारिश आती है, कभी फुरसत निकालकर उस पर गौर करें। आपको तुरंत दिख जाएगा कि ये वैसे स्टॉक्स हैं जो पहले से काफी चढ़ चुके हैं। आगे थोड़ा बहुत चढ़ेंगे तो रिटेल ट्रेडरों की खरीद के बल पर। अगर खुदा-न-खास्ता कंपनी का भविष्य काफी चमकदार दिख रहा हो तभी उसमें संस्थाओं की खरीद के दम पर ब्रेकआउट की गुंजाइश होती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

बिजनेस चैनलों पर, अखबारों में, वेबसाइटों व सोशल मीडिया पर ऐसा दावा करनेवालों की कमी नहीं कि हमने जैसा कहा था, वैसा हुआ। ये लोग सूरज के पूरब से उगने का भी श्रेय लूट लेते हैं। खुद को एनालिस्ट बताते हैं। हैं विशुद्ध धंधेबाज़। हम इनके झांसे में न आएं तो इनका धंधा बैठ जाएगा। यह सच वे कभी नहीं बताते कि भविष्य अनिश्चित है। शेयर बाज़ार में निश्चितता नहीं, प्रायिकता चलती है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

समाज व राजनीति की तरह शेयर बाज़ार में भी ठगों की कमी नहीं। लंबी हांकना इनकी फितरत है। भावनाओं को हवा देकर ये अपना शिकार करते हैं। शेयर बाज़ार में इसका खास तरीका है मल्टी-बैगर का। फेंकते हैं कि फलानां शेयर कुछ महीनों-साल में कई गुना हो जाएगा। यह बहुत बड़ा फ्रॉड और घोटाला है क्योंकि पहले से बताना असंभव है कि कोई शेयर इतने साल में इतना गुना हो जाएगा। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी