ठीक पिछली उठान पर संस्थाओं की खरीद आ सकती है और पिछली गिरावट पर संस्थाएं बिकवाली कर सकती हैं। लेकिन ध्यान रहे कि वित्तीय बाज़ार में कुछ भी 100% पक्का नहीं। यहां प्रायिकता चलती है। हो सकता है और नहीं भी। इसलिए ट्रेडर को हमेशा रिस्क मैनेज करके चलना पड़ता है। दिक्कत है कि वित्तीय जगत में घाघ भरे पड़े हैं। इसमें ट्रेडिंग की अपनी धार हर किसी को खुद निकालनी पड़ती है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

आखिरी भाव से पिछली उठान या गिरावट को आप स्टॉक के साप्ताहिक चार्ट पर भी लोकेट कर सकते हैं। डेली और साप्ताहिक चार्ट में भाव का यही वो स्तर है, जहां पर संस्थागत निवेशकों की खरीद/बिक्री आ सकती है। इसके साथ आरएसआई जैसे संकेतकों और भावों के मूविंग औसत की रेखाओं का भी मिलान करना होता है। इन सबसे जो स्तर निकलता है, वो काफी सटीकता से संस्थाओं की चाल बता देता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

कैसे पता लगाया जाए कि बड़े संस्थागत निवेशक बाज़ार में कहां खरीद-बेच रहे हैं। बहुतेरे लोग कहेंगे कि यह पता लगाना दूर-दूर संभव नहीं। फिर, बड़े-बड़े नाम लेकर लोग उल्लू ही बनाते हैं। हम कहते हैं कि आपको कहीं और जाने की ज़रूरत नहीं है। बीएसई या एनएसई पर स्टॉक का डेली/वीकली चार्ट खोलिए। आखिरी भाव से बाईं तरफ चलते जाइए। जहां से पिछली बार भाव चढ़े या गिरे थे, वहीं रुक जाएं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं तो गांठ बांध लें कि आप किसी शेयर नहीं, बल्कि कंपनी में निवेश कर रहे हैं। साथ ही यह निवेश इसलिए है ताकि आपकी बचत को मुद्रास्फीति खोखला न कर सके। नौकरीपेशा लोग मुद्रास्फीति की मार सहने को अभिशप्त हैं। चूंकि कंपनियां अपने धंधे से बराबर मुद्रास्फीति को मात देती रहती हैं, इसलिए हम उनके साथ अपनी बचत का अंश नत्थी कर देते हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी