यूं तो शेयरों के भाव मुख्यतः कंपनी से जुड़ी खबरों से प्रभावित होते हैं। लेकिन अपने यहां खबर सब तक पहुंचते-पहुंचते इतनी जूठी हो चुकी होती है कि उसमें कोई दम नहीं बचता। ऐसा न भी हो तो उस पर खेलनेवाले इतने ज्यादा ताकतवर हैं कि रिटेल ट्रेडर के पास खेलने को कुछ बचता नहीं। इसीलिए नियम है कि आम ट्रेडर को खबरवाले दिन बाज़ार से दूर रहना चाहिए। लेकिन आखिर कब तक? अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार वही है जहां हर वक्त खरीदने और बेचने के मौके बराबर रहते हैं। वैसे अपना शेयर बाज़ार अभी सातवें आसमान पर है तो खरीदने के मौके बहुत कम हैं। यह अलग बात है कि लोगबाग लालच में पहले से चढ़े हुए को ही खरीदने में लगे हैं। लेकिन समझदारी न बरतें तो आज का निवेश कल का रोना बन जाता है। तथास्तु में आज पेश है इस चढ़े हुए बाज़ार में भी निवेश का अच्छा मौका…औरऔर भी

अचानक बाज़ार के गिर जाने पर सारी सावधानी के बावजूद दिल बैठ जाता है। जब अच्छी-खासी मजबूत कंपनियों के शेयर भी गोता लगाने लगते हैं और सारी पूंजी उड़ने लगती है, तब किसी का भी आहत होना स्वाभाविक है। लेकिन हम बराबर कहते रहे हैं कि अगर बुद्ध नहीं बन सकते तो आपको वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए। आपको अपना भावनात्मक संतुलन किसी भी हाल में नहीं टूटने देना चाहिए। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार का मूड बड़ा अस्थिर है। ऐसे में मान लीजिए, आपने 5-10 दिन की ट्रेडिंग के लिए कोई शेयर खरीदा है तो उसमें स्टॉप-लॉस उठाते जाने के साथ आपको उसका ट्रिगर भी लगाना चाहिए। जैसे, ‘एबीसी’ कंपनी का शेयर आपने 120 पर 132 के लक्ष्य के साथ खरीदा। पहला स्टॉप-लॉस 118 का। बढ़कर 128 तक पहुंचा तो आपने स्टॉप-लॉस 125 का कर दिया। लेकिन साथ ही स्टॉप-लॉस ट्रिगर 125.45 का रख देना चाहिए। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी