चार्ट पर लगातार हरी-हरी कैंडल बनती जाती है तो हर किसी को लगता है कि खरीदते जाओ क्योंकि शेयर का बढ़ना तो पक्का है। लेकिन हम भूल जाते हैं कि बाज़ार में हर कोई मुनाफा कमाने आया है और शेयर के चढ़ने के बाद बेचेगा नहीं तो सचमुच का मुनाफा कहां से कमाएगा। इसलिए हमें साप्ताहिक या महीने के चार्ट से देखना पड़ता है कि ठीक पिछली बार कहां पर मुनाफावसूली चली थी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

चार्ट की भाषा फॉर्मूलों में बांधकर नहीं समझी जा सकती। इसीलिए टेक्निकल एनालिसिस के पच्चीसों इंडीकेटर लेकर भी 95% ट्रेडर बाज़ार में पिटते-पिटाते रहते हैं। हमें रूढ़िगत धारणाओं से निकलना होगा। जैसे, माना जाता है कि हरी कैंडल तेज़ी और लाल कैंडल गिरावट का संकेत देती है। लेकिन रंग से ज्यादा कैंडल का आकार और स्थान मायने रखता है। उससे भी ज्यादा अहम है कि ये कैंडल किस ज़ोन में बने हैं। अब लगाएं बुध की बुद्धि…औरऔर भी

कोई खबर नहीं, कोई सूत्र नहीं, कोई सनसनी या टिप्स नहीं। रिटेल ट्रेडरों को अगर शेयर या किसी वित्तीय बाज़ार से कमाना है तो उनके पास एकमात्र साधन है उनके भावों का चार्ट और उसे पढ़ने की कला। इसमें टेक्निकल एनालिसिस केवल वर्णमाला है। अक्षरों को पहचानने के बाद शब्द और वाक्य हमें ही बनाने पड़ते हैं। मूल बात है चार्ट पर बाज़ार की सबल भावना को पढ़ना और उससे खेलना। अब पकड़ते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

अगर कोई रिटेल ट्रेडर सोचता है कि वह खबरों पर खेलकर बाज़ार से नोट बना लेगा तो यह उसकी निपट मूर्खता है। खबरों पर या तो कंपनी के प्रवर्तक व अंदर के लोग या उनसे गहरा ताल्लुक रखनेवाली संस्थाएं ही कमाती हैं। प्रवर्तक अमूमन खुद सीधे कुछ नहीं करते, बल्कि कामयाब निवेशकों का पट्टा पहने ऑपरेटरों का सहारा लेते हैं। कई तो रिसर्च कंपनियों की आड़ में धूर्त प्रवर्तकों की सेवा करते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार मुख्यतः चार दौर या चक्र से गुजरता है: निराशा, संशय, आशा और उन्माद। निराशा के दौरान जमकर खरीदना और एकदम नहीं बेचना चाहिए। संशय के दौरान संभलकर खरीदना और थोड़ा-थोड़ा बेचकर मुनाफा बनाना चाहिए। आशा के दौर में सावधानी से खरीदना और बराबर बेचकर मुनाफा निकालना चाहिए। वहीं, उन्माद के दौर में जमकर बेचना और बेहद चुनिंदा खरीद करनी चाहिए। अभी हमारा बाज़ार उन्माद के दौर में है। अब तथास्तु में आज की संभावनामय कंपनी…औरऔर भी