रुपया, अमेरिकी डॉलर या यूरोपीय यूरो। अपने-आप में इन मुद्राओं का कोई मूल्य नहीं। वास्तव में वो महज कागज का टुकड़ा हैं, माया हैं। उनका मूल्य इससे बनता है कि उनमें माल या सेवा खरीदने की कितनी औकात है। इसी तरह कंपनी में निवेश करते वक्त हमें सिर्फ यही नहीं देखना चाहिए कि उसके शेयर का भाव क्या है, बल्कि यह भी कि उसकी औकात या मूल्य क्या है। आज पेश है तथास्तु में एक मूल्यवती कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के साथ आज क्यों न कुछ अपनी और देश की बात कर लें। यह महीना असल में बड़ा खास है। 9 अगस्त को ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ व 15 अगस्त को आज़ादी की 70वीं वर्षगांठ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से बोलेंगे तीसरी बार। अर्थव्यवस्था ठीक, पर अपग्रेड ज़रूरी। हम भी करेंगे तकनीकी व संपादकीय अपग्रेड। इसलिए 6 ट्रेडिंग सत्रों की छुट्टी। अगला कॉलम आएगा सोमवार, 21 अगस्त को। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी