मनाओ, जमकर गिर जाए बाज़ार
शेयर बाज़ार का अपना स्वभाव होता है और उस पर मानने या मनाने का कोई असर नहीं पड़ता। मगर, जिस तरह इस वक्त तमाम अच्छी कंपनियों के शेयर चढ़े हुए हैं, उसमें इच्छा होती है कि काश! वे जमकर गिर जाते तो हमें निवेश का सुरक्षित मौका मिल जाता। फिलहाल, इच्छाओं को परे रखकर हमें समय की शरण में चले जाना चाहिए और अच्छे शेयरों के गिरने का इंतज़ार करना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
आजमाई कंपनियों तक ही सीमित रहें
अहम सवाल। कमज़ोर अर्थव्यवस्था के बीच लगातार चढ़ते बाज़ार में कैसे ट्रेड करें? एक तरीका यह है कि ट्रेडिंग से परहेज़ करें, कैश संभालकर रखें और चुनिंदा मजबूत कंपनियों में लंबे निवेश का मौका पकड़े। दूसरा तरीका यह है कि ट्रेडिंग की अवधि पांच-दस दिन से घटाकर दो-चार दिन की कर दें। तीसरा तरीका है कि पांच-दस आजमाई हुई कंपनियों में ही ट्रेड करें और बहुत ज्यादा उधर-उधर हाथ-पैर न फैलाएं। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
ब्रेकआउट की रणनीति है बहुत रिस्की
बढ़ते बाज़ार में लहरों के हिसाब से नीचे आने पर खरीदने का सौदा बहुत कारगर नहीं होता। जब शेयर बराबर नया उच्चतम स्तर बना रहे हों, तब ब्रेकआउट ट्रेड ही सबसे कारगर रणनीति होती है। रोज़ाना के भावों के चार्ट पर उठते त्रिभुज का पैटर्न ब्रेकआउट की दस्तक देता है, लेकिन किसी भी हालत में ऊपर और नीचे आने की प्रायिकता 50:50 से बेहतर नहीं होती। मतलब ट्रेड करना बहुत-बहुत रिस्की होता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
ट्रेडिंग रोक निवेश करने में कोई हर्ज!
जब बाज़ार चढ़ान पर हो तो गिरे हुए शेयरों में ट्रेड करना अक्सर घाटे का सौदा साबित होता है। यह अलग बात है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल तगड़ा हो और वो हर कोण से मजबूत हो तो देर-सबेर उसके शेयर का बढ़ना तय है। ऐसा ही हाल इस समय तमाम फार्मा कंपनियों का है। लेकिन इनमें दीर्घकालिक निवेश करना ज्यादा लाभदायी होगा, जबकि ट्रेड करने पर फंसान हो सकती है। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी






