जीडीपी पर हवाबाज़ी, गई मैन्यूफैक्चरिंग
देश में जीडीपी पर भरपूर हवाबाज़ी बदस्तूर जारी है। लेकिन बेरोज़गारी पर कोई बहस नहीं। मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया के तहत औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने का दावा किया। लेकिन पिछले 11 सालों में जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग का योगदान बराबर घटता गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 2025 तक जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग का हिस्सा 25% पर पहुंचा देंगे। हकीकत यह है कि यह 2011-12 में जीडीपी का 17.4% हुआ करताऔरऔर भी
करोड़ों रोज़गार का दावा, वादा तेरा वादा
भारत स्वरोज़गार-प्रधान देश पहले भी था और अब भी है। पर अभी तक किसी सरकार ने स्वरोज़गार का श्रेय लेने की जुर्रत नहीं की थी। मगर श्रेय लेने क राजनीति में ही पले-बढ़े नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने आम लोगों के स्वरोज़गार का सारा श्रेय खुद ले लिया। इसी आधार पर उनके अर्थशास्त्री गिनाते हैं कि 2014 से 2024 के दौरान देश में 17.19 करोड़ नए रोज़गार पैदा हुए हैं। यानी, हर साल औसतन 1.72 करोड़औरऔर भी
निकलने लगी जीडीपी के गुब्बारे की हवा
हमारे गृह मंत्री अमित शाह हवा-हवाई प्रचार के गुब्बारे में छेद करने में माहिर हैं। दस साल पहले जब हर तरफ प्रधानमंत्री बन चुके नरेंद्र मोदी का जलवा-जलाल छाया हुआ था, तब उन्होंने 5 फरवरी 2015 को एबीपी न्यूज़ पर प्रसारित एक इंटरव्यू में कह दिया कि मोदीजी ने अपनी चुनाव सभाओं में हर किसी के एकाउंट में 15 लाख डालने की जो बात कही थी, वो एक जुमला थी। अभी पिछले हफ्ते शुक्रवार को उन्होंने अंतरराष्ट्रीयऔरऔर भी
निवेश मांगे दूरदर्शिता, शेयर बाजार नहीं
अपने शेयर बाज़ार में बहुत सारी विसंगतियां हैं, सब कुछ आधुनिक ही नहीं, अत्याधुनिक हो जाने के बावजूद। साल में ट्रेड होने वाले कॉन्ट्रैक्ट की संख्या को आधार बनाएं तो हमारा एनएसई लगातार छह सालों से दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज बना हुआ है। लेकिन इंडेक्स ऑप्शंस के वोल्यूम की गणना डेरिवेटिव सेगमेंट की पूरी ट्रेडिंग की गलत तस्वीर पेश करती है। वैसे, इसे डेल्टा आधारित बनाकर दुरुस्त की कोशिशें जारी हैं। फिर, अपने बाजार मेंऔरऔर भी






