कच्चे तेल के बढ़ते दाम और कमज़ोर होते रुपए ने देश पर दोहरी मार लगाई है। पांच साल बाद भारत फिर से ब्राज़ील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका व तुर्की के साथ दुनिया की पांच भंगुर अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाने लगा है। यह चिंता की बात है। लेकिन भारतीय विकास गाथा इतनी लंबी है कि ज्यादा परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। आज तथास्तु में ऐसी कंपनी, जिसमें कम से कम दस साल का निवेश बहुत फलदायी साबित होगा…औरऔर भी

भावों के रुख बदलने का सूत्र शेयर बाज़ार जैसे वित्तीय बाज़ार ही नहीं, बल्कि हर बाज़ार पर लागू होता है चाहे वो बांड, फ्यूचर्स व ऑप्शंस, विदेशी मुद्रा, बिटकॉइन या रीयल एस्टेट ही क्यों न हो। इसे हम छोटे समय की ट्रेडिंग, लंबे समय के निवेश, वित्तीय सुरक्षा और रिटायरमेंट प्लानिंग जैसे तमाम वित्तीय उद्देश्यों को पूरा करने में इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन हम सप्लाई और डिमांड के असंतुलन को पकड़े कैसे? अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार कहां मुड़ेगा और उसकी भावी चाल क्या होगी, इसका सटीक तो नहीं, लेकिन काफी हद तक सही अनुमान लगाना संभव है। सीधा-सा सूत्र है कि भाव वहीं रुख बदलते हैं, जहां सप्लाई और डिमांड का संतुलन एकदम बिगड़ जाता है। बैंक, प्रोफेशनल ट्रेडर व वित्तीय संस्थान बाज़ार से बराबर जमकर मुनाफा कमाते हैं और वे ही वहां सबसे ज्यादा असंतुलन पैदा करते हैं क्योंकि वे भारी मात्रा में खरीदते या बेचते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

मसला चाहे दीर्घकालिक निवेशक का हो या अल्पकालिक ट्रेडर का, उन्हें अगर शेयर बाज़ार से बराबर कमाना है तो दो ही सवाल मायने रखते हैं। पहला यह कि शेयर के भाव कहां से पलटी मारेंगे और दूसरा यह कि भाव उठते-उठते फिलहाल कहां तक जाएंगे। बहुत-से लोग सोचते हैं कि बाज़ार कहां मुड़ेगा और उसकी चाल क्या होगी, इसका अनुमान पहले से नहीं लगाया जा सकता। लेकिन यह पूरा नहीं, अधूरा सच है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

यह कोई अचंभे की बात नहीं कि बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के ट्रेजरी विभाग में काम करनेवाले प्रोफेशनल वित्तीय बाज़ार में बहुत शिक्षित-प्रशिक्षित होते हैं। उनकी तनख्वाह भी औसत कर्मचारी से कई गुना होती है। वहीं, औसत निवेशक व ट्रेडर अक्सर मन की बात या किसी की टिप्स पर दांव लगाते हैं और अपनी बची-खुची पूंजी भी लुटाते रहते हैं। यह स्थिति किसी सरकार या संस्था को नहीं, उन्हें खुद ही बदलनी होगी। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी