वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग/निवेश में दो ही तरह के समूह सक्रिय रहते हैं। पहला वो जिसके लोग जानते हैं कि वे क्या कर रहे हैं। इसमें बैंक, वित्तीय संस्थाएं व प्रोफेशनल ट्रेडर आते हैं। दूसरे समूह में वे आते हैं जो नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं। इसमें रिटेल ट्रेडर/निवेशक आते हैं जो अमूमन अंधेरे में तीर चलाते हैं। पहला समूह दूसरे समूह की भावुकता और उछलकूद से जमकर कमाता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अच्छी बात है कि जून 2018 की तिमाही में हमारा जीडीपी 8.2% बढ़ गया है। यह पिछली नौ तिमाहियों की सबसे तेज़ विकास दर है। मगर चिंता की बात है कि यह तेज़ी सरकारी खर्च बढ़ने से आई है और सकल स्थाई पूंजी निर्माण या अर्थव्यवस्था में निवेश की दर 28.8% पर अटकी है, जबकि यूपीए सरकार के आखिरी व सबसे खराब साल 2013-14 तक में यह दर 31.3% रही थी। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

आम धारणा है कि शेयर बाज़ार में 95% ट्रेडर गंवाते और केवल 5% ट्रेडर कमाते हैं। लेकिन कड़वा सच यह है कि गंवाने वाले सभी रिटेल ट्रेडर हैं, जबकि कमाने वालों में प्रोफेशनल ट्रेडर, बैंक और देशी-विदेशी वित्तीय संस्थाएं शामिल हैं। रिटेल ट्रेडर अपने इस हश्र से तभी बच सकता है, जब वो संस्थाओं की शैली और राह अपना ले। इसके लिए उसे टेक्निकल से आगे बढ़ कर डिमांड-सप्लाई का सूत्र समझना होगा। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार ऐसी जगह है जहां धोखा व फरेब जमकर चलता है। होता है कुछ और दिखाया जाता है कुछ और। बाज़ार काफी बढ़ चुका होता है, तब म्यूचुअल फंड खरीद करते हैं। लोगबाग खरीदने दौड़ पड़ते हैं। तभी अखबार, पत्रिकाएं और टीवी चैनल तेज़ी का हल्ला मचाते हैं। ऐसे माहौल में समझदार निवेशक हाथ बांधे रहते हैं, जबकि आम ट्रेडर भेड़चाल के शिकार हो जाते हैं और अपना सत्यानाश कर बैठते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी